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वट सावित्री व्रत 2026: सास को 'बायना' देने से चमकता है पति का भाग्य, जरूर शामिल करें ये 5 चीजें

Published: Fri, 15 May 2026 11:15 AM (IST)

बायने की थाली को पूजा करने के बाद सास को दिया जाता है और उनका चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लिया जाता है।

वट सावित्री व्रत 2026 बायना (Picture Credit- AI Generated)

वट सावित्री व्रत 2026 बायना (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को मनाया जाएगा

  2. बायना देने से पति को लंबी आयु मिलती है

  3. यह रस्म सास-बहू के रिश्ते को मजबूत करती है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत किया जाता है, जो इस बार 16 मई को किया जाएगा। इस दिन पर महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत करती हैं।

माना गया है कि इस दिन किया गया व्रत अखंड सौभाग्य प्रदान करता है। करवाचौथ की तरह ही इस दिन पर महिलाएं अपनी सास को बायना भी देती हैं, जिसका विशेष महत्व है। चलिए जानते हैं इस बारे में।

सास को बायना देने का महत्व

वट सावित्री व्रत में सास को बायना देना सुहाग और आशीर्वाद का प्रतीक माना गया है, जो सौभाग्य में भी वृद्धि करता है। बायने में मुख्य रूप से बहू द्वारा सास को सुहाग की सामग्री भेंट की जाती है। बदले में सास अपनी बहू को 'अखंड सौभाग्य' का आशीर्वाद देती है। कहा जाता है कि सास को बायना देने पर ही व्रत पूर्ण होता है और पति को आयु लंबी का आशीर्वाद मिलता है।

रिश्ते में आती है मजबूती - सदियों से चली आ रही यह परंपरा बहू द्वारा सास के प्रति सम्मान और प्रेम को भी दर्शाती है। साथ ही यह रस्म सास-बहू के बीच के रिश्ते को मजबूत करने और मधुरता लाने का भी काम करती है।

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(Picture Credit: Freepik)

बायने में क्या-क्या सामान रखें?

वट सावित्री व्रत में सास को बायना देते समय उसमें यह जरूरी सामग्री रखना न भूलें -

  • प्रसाद - भीगे काले चने, जो वट सावित्री पूजा का सबसे महत्वपूर्ण प्रसाद है
  • सुहाग सामग्री - सिंदूर, लाल चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, काजल, आलता, और नई साड़ी आदि
  • मौसमी फल - आम, तरबूज, खरबूजा, केला और नारियल आदि
  • पकवान - भीगे चने, पुआ, या पूरी
  • अन्य जरूरी समाग्री - बांस का पंखा (या हाथ का पंखा), बांस का सूप, सूती धागा और दक्षिणा (नकद राशि),
  • मीठा - बताशे या मिठाई
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(Picture Credit- AI Generated)

भूल से भी न करें ये गलती

  • भूलकर भी इस्तेमाल किया हुआ शृंगार का सामान सास को न दें।
  • बायने में काले, सफेद या गहरे नीले रंग की साड़ी देने से बचना चाहिए।
  • बायने की थाली में कैंची, चाकू, सुई या पिन जैसी धारदार चीजें न रखें।
  • अगर सास सुहागन हैं तो उन्हें शृंगार का पूरा सामान देना चाहिए। लेकिन यदि सास सुहागन नहीं हैं, तो बायने में सुहाग का सामान न रखें।
  • बायने में चमड़े से बनी कोई वस्तु न दें।
  • इसके साथ ही बायना देने में न तो बहुत जल्दबाजी करें और न ही इसे बहुत देर से दें। सास के चरण स्पर्श करके और आशीर्वाद लेकर ही बायना देना चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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