Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    वट सावित्री व्रत 2026: आसपास बरगद का पेड़ नहीं है? तो इन 5 आसान तरीकों से पूरी करें अपनी पूजा

    Updated: Fri, 15 May 2026 10:49 AM (IST)

    वट सावित्री व्रत 2026 में अगर बरगद का पेड़ न मिले तो पूजा कैसे करें? जानें वट वृक्ष की टहनी, तस्वीर और मानसिक पूजा जैसे आसान विकल्प। ...और पढ़ें

    बरगद का पेड़ न मिले तो ऐसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा (AI-Generated Image)

    बरगद का पेड़ न मिले तो ऐसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा (AI-Generated Image)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखा जाता है। इस साल वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) 16 मई 2026 को मनाया जाएगा। इस व्रत में वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

    मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन बरगद के पेड़ के नीचे ही देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान को पुनर्जीवन दिलाया था। यही वजह है कि इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करके उसके चारों ओर कच्चा सूत लपेटती हैं। लेकिन, कई बार आसपास बरगद का पेड़ नहीं होता या महिलाएं यात्रा में होती हैं। ऐसे में पूजा कैसे करें, इसे लेकर लोगों के मन में सवाल रहता है।

    वट वृक्ष की टहनी से करें पूजा

    अगर आसपास बरगद का पेड़ न हो तो व्रत से एक दिन पहले वट वृक्ष की टहनी मंगवा सकते हैं। उसे मिट्टी भरे गमले में लगाकर पानी दें। व्रत वाले दिन उसी को वट वृक्ष मानकर पूजा करें और कच्चा सूत लपेटें। पूजा के बाद उस टहनी को बहते जल में प्रवाहित किया जा सकता है।

    मानसिक रूप से भी कर सकते हैं पूजा

    शास्त्रों में मानसिक पूजा का भी महत्व बताया गया है। अगर किसी कारण वट वृक्ष उपलब्ध न हो तो मन में बरगद के पेड़ की कल्पना करके श्रद्धा भाव से पूजा की जा सकती है।

    खबरें और भी

    तस्वीर के जरिए करें व्रत पूजा

    बाजार में वट सावित्री व्रत की तस्वीरें मिल जाती हैं, जिनमें सावित्री-सत्यवान और बरगद का पेड़ बना होता है। ऐसी तस्वीर को सामने रखकर भी विधि-विधान से पूजा की जा सकती है।

    वट वृक्ष की आकृति बनाकर करें पूजा

    एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर हल्दी से वट वृक्ष की आकृति बनाई जा सकती है। इसके बाद उसी की पूजा और परिक्रमा करके सूत अर्पित किया जाता है।

    वट वृक्ष की पूजा का धार्मिक महत्व

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में त्रिदेवों का वास माना गया है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का निवास बताया गया है। मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा से अखंड सौभाग्य, संतान सुख और ग्रह दोषों से राहत मिलती है।

    यह भी पढ़ें- 16 को पत्नियां पति को झलेंगी पंखा, वट सावित्री व्रत में अखंड सौभाग्य के लिए करेंगी पूजा

    यह भी पढ़ें- वट सावित्री व्रत पर भरणी नक्षत्र का विशेष संयोग, अधिक बढ़ा ग्रहों की शुभ युति से व्रत का महत्व

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।