वट सावित्री व्रत की शुरुआत कैसे करें? पहली बार रख रही हैं उपवास, तो जान लें ये जरूरी नियम
पहली बार वट सावित्री व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यहां दिए गए नियमों का ध्यान रखें। ...और पढ़ें

Vat Savitri Vrat For Beginners: वट सावित्री व्रत नियम। AI Generated image

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। अगर आप शादी के बाद पहली बार यह व्रत रखने जा रही हैं, तो खुशी के साथ-साथ मन में कई सवाल आते हैं कि इस व्रत का पालन कैसे करें? कहीं कोई गलती न हो जाए।
शास्त्रों के अनुसार, किसी भी व्रत की शुरुआत अगर सही नियमों के साथ की जाए, तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में इस व्रत से जुड़े कठिन नियमों को जानते हैं।
पहली बार व्रत रखने वालों के लिए जरूरी नियम

AI Generated image
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और संकल्प
व्रत के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और हो पाए तो लाल या पीले कपड़े पहनें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
सोलह शृंगार का महत्व
पहली बार व्रत रख रही महिलाओं को नई दुल्हन (16 शृंगार) की तरह सजने की परंपरा है। हाथों में मेहंदी, माथे पर सिंदूर और पैरों में महावर जरूर लगाएं। यह सौभाग्य का प्रतीक है।
वट वृक्ष पूजन
पूजा के लिए एक ऐसे बरगद के पेड़ चुनें, जहां पूजा-पाठ किया जाता हो। अगर बाहर जाना न हो पाए, तो घर में वट वृक्ष की कोपल वाली टहनी लाकर भी पूजा कर सकते हैं।
कच्चा सूत और परिक्रमा
वट सावित्री में बरगद के पेड़ के चारों ओर सूत लपेटते हुए परिक्रमा की जाती है। पहली बार में कम से कम 7, 11 या 108 बार परिक्रमा करने का प्रयास करें।
पूजन सामग्री की तैयारी
बांस की टोकरी में सात तरह के अनाज, भीगे हुए चने, कलावा, धूप-दीप और मौसमी फल जरूर रखें।
सावित्री-सत्यवान की कथा
पूजा के दौरान सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ें या सुनें। यह कथा हमें पतिव्रत धर्म और संकल्प की शक्ति सिखाती है।
भीगे चने का प्रसाद
इस व्रत में भीगे हुए चनों का बहुत महत्व है। कुछ क्षेत्रों में पूजा के बाद चने खाकर ही व्रत खोलने की परंपरा है, जबकि कुछ लोग शाम को पारण करते हैं।
काले रंग से परहेज
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं भूलकर भी काले या नीले रंग के कपड़े न पहनें। लाल, गुलाबी, पीला या नारंगी रंग शुभ माना जाता है।
दान-दक्षिणा
पूजा पूर्ण होने के बाद अपनी सास या घर के बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें सुहाग की सामग्री चढ़ाएं।
सात्विक भोजन
व्रत के अगले दिन या पारण के समय तामसिक भोजन से दूर रहें और सात्विक भोजन ही करें।
यह भी पढ़ें- वट सावित्री व्रत: पति की लंबी उम्र के लिए बरगद पर बांधें रक्षा सूत्र, नोट करें पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
यह भी पढ़ें- सालों बाद बना शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का दुर्लभ 'महासंयोग', अपनी राशि के अनुसार करें ये 1 दान
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।