वृषभ संक्रांति 2026: सूर्य देव के ये 5 सिद्ध मंत्र खोलेंगे सफलता के बंद द्वार, समाज में बढ़ेगा मान-सम्मान
वृषभ संक्रांति पर स्नान, दान और सूर्य देव के मंत्रों का जप करने से पुण्य फल और सफलता मिलती है। ...और पढ़ें

सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये विशेष काम (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
वृषभ संक्रांति है सूर्य देव के वृषभ राशि में प्रवेश का दिन
पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का है विशेष महत्व
सूर्य मंत्रों के जप से मिलती है सफलता और मान-सम्मान
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में साल में आने वाली 12 संक्रांति का विशेष महत्व माना गया है। जब सूर्य देव वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे 'वृषभ संक्रांति' के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को सूर्य देव की कृपा के लिए बहुत ही पवित्र माना जाता है।
साथ ही इस दिन पर नदी में स्नान करने और गरीबों में दान आदि करने से भी जातक को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन पर सूर्य देव के मंत्रों का जप करना भी बहुत प्रभावकारी माना गया है।
वृषभ संक्रांति शुभ मुहूर्त
वृषभ संक्रांति का शुक्रवार, 15 मई को पड़ रही है। इस दौरान शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेंगे -
- वृषभ संक्रांति पुण्य काल - सुबह 5 बजकर 30 मिनट से सुबह 6 बजकर 28 मिनट तक
- वृषभ संक्रान्ति का क्षण - सुबह 6 बजकर 28 मिनट तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 5 बजकर 30 मिनट से रात 8 बजकर 14 मिनट तक
- ब्रह्म मुहूर्त - प्रात: 4 बजकर 7 मिनट से प्रातः 4 बजकर 49 मिनट तक
सूर्य देव के मंत्र
1. सूर्यदेव मूल मंत्र - ॐ घृणिसूर्याय नमः।
2. सूर्य बीज मंत्र - ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।
3 सूर्य एकाक्षरी मंत्र - ह्रां॥
4 सूर्य पञ्चाक्षर मंत्र -ॐ सूर्याय नमः।
3. सूर्य गायत्री मंत्र - ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि, तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥
4. श्री सूर्यनारायण मंत्र - ॐ सूर्यनारायणायः नमः।
5. सूर्य आरोग्य मंत्र -
ॐ नमः सूर्याय शान्ताय सर्वरोगनिवारिणे।
आयुरारोग्यमैश्वर्यं देहि देव जगत्पते॥
6. सूर्य प्रणाम मंत्र -
ॐ जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महद्युतिम्।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
7. सूर्य प्रातः स्मरण श्लोक
प्रातः स्मरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यं
रूपं हि मण्डलमृचोऽथ तनुर्यजूंषि।
सामानि यस्य किरणाः प्रभवादिहेतुं
ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यमचिन्त्यरूपम्॥
8. सूर्य कामनापूर्ति मंत्र -
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय
मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा॥
9. सूर्य शत्रुनाशक मन्त्र
उदसौ सूर्यो अगादुदिदं मामकं वचः।
यथाहं शत्रुहोऽसान्यसपत्नः सपत्नहा॥
सपत्नक्षयणो वृषाभिराष्ट्रो विष सहिः।
यथाहभेषां वीराणां विराजानि जनस्य च॥

(Picture Credit- AI Generated)
जरूर करें ये काम
- वृषभ संक्रांति की सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- सुबह स्नान-ध्यान के बाद विधि-विधान से सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- यदि संभव हो तो पवित्र नदी जैसे गंगा आदि में स्नान के लिए जाएं।
- वृषभ संक्रांति के दिन अपनी क्षमता के अनुसार, अन्न, वस्त्र, आम, तरबूज और छाता आदि का दान करें।
- सूर्य देव की उपासन कर स्वास्थ्य, सुख और करियर में सफलता की कामना करें।
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