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    नई गाड़ी या सामान खरीदते ही क्यों लगाते हैं हल्दी-कुमकुम? जानिए इस पुरानी परंपरा के पीछे का असली कारण

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 03:33 PM (IST)

    क्या आपने कभी सोचा है कि नई चीज लाते ही उस पर हल्दी-कुमकुम का टीका क्यों लगाया जाता है? जानिए इस खास परंपरा के पीछे छिपे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण। ...और पढ़ें

    क्या आप भी करते हैं इस परंपरा का पालन? (AI-Generated Image)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हम कोई नई चीज खरीदकर लाते हैं, चाहे वह एक चमचमाती नई कार हो, टू-व्हीलर हो, सपनों का घर हो, सोने-चांदी के आभूषण हों या फिर रोजमर्रा के काम आने वाला कोई नया घरेलू सामान- हम उसे तुरंत इस्तेमाल करना शुरू नहीं करते। पहले उसपर हल्दी या कुमकुम का तिलक लगाते हैं।

    कई बार उस पर स्वास्तिक का शुभ चिह्न भी बनाया जाता है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि हम ऐसा क्यों करते हैं? नई चीज खरीदते ही उस पर टीका लगाने की यह प्रथा आखिर कैसे और क्यों शुरू हुई?

    परंपरा की शुरुआत और मुख्य उद्देश्य

    एस्ट्रोपत्री के अनुभवी ज्योतिषियों और विद्वानों के अनुसार, यह परंपरा भारत में सदियों से चली आ रही है और इसके पीछे एक बहुत ही गहरा अर्थ छिपा है। हमारे समाज में किसी भी वस्तु को सिर्फ इस्तेमाल की चीज या भौतिक सुख नहीं माना जाता। हम हर साधन को ईश्वर का आशीर्वाद या उनका प्रसाद मानते हैं।

    नई चीज पर हल्दी-कुमकुम लगाने का मुख्य उद्देश्य उस वस्तु को शुभ बनाना और ईश्वर के प्रति अपना सच्चा आभार जताना है। इसके साथ ही, यह भी माना जाता है कि नई और चमचमाती चीजों पर बहुत जल्दी लोगों की 'बुरी नजर' लग जाती है। हल्दी और कुमकुम का यह टीका उस वस्तु को आस-पास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षित रखने का काम करता है।

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    हल्दी और कुमकुम का खास धार्मिक महत्व

    सनातन धर्म की पूजा-पद्धति में इन दोनों ही सामग्रियों को अत्यंत पवित्र और मांगलिक माना गया है:

    हल्दी का महत्व: ज्योतिष में हल्दी को सीधे तौर पर देवगुरु बृहस्पति से जोड़कर देखा जाता है। यह पीला मसाला न सिर्फ सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक औषधि है, बल्कि यह हर तरह की नकारात्मकता और अशुद्धियों को खत्म करने की ताकत रखता है। नई चीज पर हल्दी लगाने से उसमें शुद्धता आती है।

    कुमकुम का महत्व: कुमकुम (रोली) को धन की देवी माता लक्ष्मी और ब्रह्मांड की ऊर्जा (शक्ति) का प्रतीक माना जाता है। लाल रंग का कुमकुम जीवन में सौभाग्य, सफलता और समृद्धि का संचार करता है।

    जब हम किसी नई वस्तु पर हल्दी-कुमकुम का टीका लगाते हैं, तो हम उस निर्जीव भौतिक वस्तु को एक शुभ ऊर्जा से भर देते हैं।

    वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण

    वैज्ञानिक कारण: अगर हम इसे वैज्ञानिक नजरिए से देखें, तो हल्दी में शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल (रोगाणुरोधक) गुण पाए जाते हैं। इसके इस्तेमाल से न सिर्फ हवा शुद्ध होती है, बल्कि वातावरण में एक पॉजिटिव एनर्जी फैलती है।

    आध्यात्मिक संकल्प: वहीं, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह एक संकल्प लेने जैसा है। नई चीज पर तिलक लगाकर हम खुद से और ईश्वर से यह वादा करते हैं कि हम इस नई सुविधा का उपयोग हमेशा अच्छे, सही और भलाई के कार्यों के लिए करेंगे। यह छोटी सी परंपरा इंसान को यह याद दिलाती रहती है कि जीवन में हमें जो भी सुख-सुविधाएं मिली हैं, वे सब ऊपर वाले की कृपा का ही नतीजा हैं। इसलिए, किसी भी नई चीज की शुरुआत हमेशा प्रभु का स्मरण करके और अपने अंदर के अहंकार को दूर रखकर ही करनी चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।