भगवान शिव क्यों करते हैं चिता की भस्म से शृंगार? जानिए शिव पुराण में छिपा इसका रहस्य
हिंदू धर्म में भगवान शिव का चिता की भस्म से शृंगार वैराग्य और जीवन की सच्चाई का प्रतीक है। शिव ...और पढ़ें

महादेव के वैरागी रूप और चिता भस्म का संबंध (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सावन के महीने का अधिक महत्व है। यह महीना भगवान शिव को अधिक प्रिय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पवित्र महीने भगवान शिव का जलाभिषेक करने से जीवन में आने वाले सभी संकट दूर होते हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही महादेव की कृपा बरसती है। महादेव का चिता की भस्म से खास संबंध है।
हिंदू धर्म में चिता की भस्म को वैराग्य, जीवन की सच्चाई और मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव का चिता की भस्म से शृंगार करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं चिता की भस्म से महादेव का शृंगार क्यों किया जाता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में।

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महादेव को क्यों प्रिय है भस्म
पौराणिक कथा के अनुसार, जब मां पार्वती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर देह त्याग दी थी, तो भगवान विष्णु ने उनके शरीर को भस्म कर दिया था। मां पार्वती के इस दुख में भगवान शिव ने अपने शरीर पर भस्म को लगा लिया था। इसलिए महादेव को भस्म अधिक प्रिय है।
भगवान शिव का चिता की भस्म से क्या है संबंध
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था। इस यज्ञ में उन्होंने सभी देवी-देवताओं को बुलाया, लेकिन उन्होंने भगवान शिव और माता सती को यज्ञ के लिए निमंत्रण नहीं दिया था। जब मां पार्वती को इस बात का पता चला, तो उन्होंने महादेव से यज्ञ में जाने के लिए कहा, लेकिन महादेव ने जाने से इंकार कर दिया।
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इसके बाद मां पार्वती जिद करने लगीं, तो भगवान शिव ने पार्वती जी को यज्ञ में जाने की अनुमति दी। जब मां पार्वती यज्ञ में पहुंचीं, तो राजा दक्ष महादेव के लिए अपशब्द बोलने लगे, जिससे भगवान शिव का अपमान हुआ। ऐसे में मां पार्वती को क्रोध आया और उन्होंने यज्ञ की अग्नि में खुद समर्पित कर दिया था।
इसके बाद भगवान शिव मां पार्वती के शव को लेकर धरती से लेकर आकाश विलाप करने लगे। भगवान विष्णु से महादेव की ये स्थिति देखी नहीं गई, तो उन्होंने मां पार्वती के शरीर को छू कर भस्म में बदल दिया, जिसके बाद महादेव पार्वती जी की भस्म को अपने हाथों में देख दुखी हुए और उन्होंने माता पार्वती को याद करते हुए राख को ही अपने शरीर पर लगा लिए। इसी वजह से भगवान शिव को भस्म पसंद है। भस्म से हम लोगों को यह खास सीख मिलती है कि व्यक्ति चाहे कितना भी गरीब हो या फिर अमीर, उसका अंत एक दिन राख ही होना। भगवान शिव इस कथा का वर्णन शिव पुराण में विद्येश्वर संहिता में मिलता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
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