गोधूलि बेला में दीया जलाना सबसे फलदायी, वास्तु दोष से परेशान लोग अभी पढ़ें नियम
शाम को घर की दहलीज पर दीया जलाने के फायदे क्या हैं? पढ़ें पद्म शास्त्र और वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके चमत्कारी लाभ, सही दिशा और नियम। ...और पढ़ें

गोधूलि बेला में दीया जलाना क्यों शुभ (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यताओं और पद्म पुराण के अनुसार, शाम का समय 'प्रदोष काल' (Pradosh Kaal) कहलाता है। माना जाता है कि इस समय माता लक्ष्मी (Mata Laxmi) पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिस घर के मुख्य द्वार पर उजाला और स्वच्छता होती है, वहां वे निवास करती हैं।
पद्म पुराण में विस्तार से वर्णन मिलता है कि दीपदान करने से न केवल अज्ञानता का अंधकार दूर होता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य का भी वास होता है। मुख्य द्वार पर दीया जलाना मां लक्ष्मी को अपने घर बुलाने का एक प्रेम भरा निमंत्रण है, जो शास्त्रों में अत्यंत शुभ बताया गया है।
वास्तु शास्त्र में भी इसका ठोस विज्ञान छिपा है। यह छोटी सी लौ न केवल अंधेरे को दूर करती है, बल्कि हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) के प्रवेश का रास्ता भी खोलती है।
क्यों जलाते हैं मुख्य द्वार पर दीया?
1. मां लक्ष्मी का निमंत्रण
धार्मिक मान्यताओं और पद्म पुराण के अनुसार, शाम का समय 'प्रदोष काल' कहलाता है। माना जाता है कि इस समय माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिस घर के मुख्य द्वार पर उजाला और सफाई होती है, वहां वो निवास करती हैं। मुख्य द्वार पर दीया जलाना मां लक्ष्मी को अपने घर बुलाने का एक प्रेम भरा निमंत्रण माना जाता है।
2. नकारात्मक ऊर्जा का खात्मा
वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को घर का 'चेहरा' माना गया है। जैसे हमारे चेहरे पर चमक जरूरी है, ठीक वैसे ही घर के द्वार पर रोशनी जरूरी है। शाम के समय जब दिन और रात मिल रहे होते हैं, तब नकारात्मक ऊर्जाएं (Negative Energy) एक्टिव होने की कोशिश करती हैं। दीये का उजाला इन ऊर्जाओं को घर में प्रवेश करने से रोक देता है और घर के भीतर सकारात्मकता का प्रवाह बनाए रखती है।
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3. यम का दीया
कुछ मान्यताओं में इसे यमराज से भी जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि शाम को घर की दहलीज पर दीया जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के लोग सुरक्षित रहते हैं।
4. पितरों का आशीर्वाद
पुराणों के अनुसार, शाम का दीया हमारे पितरों को राह दिखाता है, जिससे उनका आशीर्वाद सदैव परिवार पर बना रहता है।
5. वास्तु दोष से मुक्ति
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार 'ऊर्जा का प्रवेश द्वार' होता है। शाम के समय जब दिन और रात मिल रहे होते हैं, तब नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होने की कोशिश करती हैं। दरवाजे पर जलता दीया इन शक्तियों को घर में घुसने से रोकता है।
कैसे जलाएं दीया?
दिशा: दीया हमेशा मुख्य द्वार के दाईं ओर (घर से बाहर निकलते समय) रखना चाहिए।
तेल/घी: सरसों के तेल या शुद्ध घी का दीया जलाना सबसे उत्तम माना जाता है।
समय: सूर्यास्त के तुरंत बाद या गोधूलि बेला में दीया जलाना सबसे ज्यादा फलदायी होता है।
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