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सूर्यास्त के बाद क्यों वर्जित हैं ये 5 काम? वास्तु शास्त्र बताते हैं इसका गहरा कारण

Published: Wed, 20 May 2026 05:00 PM (IST)

सूर्यास्त के बाद कुछ ऐसे काम है जिन्हें शास्त्रों में पूरी तरीके से वर्जित बताया गया है। इन कार्यों की ...और पढ़ें

क्या आप भी सूर्यास्त के बाद करते हैं ये काम? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में आम आदमी की दिनचर्या के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। इसी में एक ये भी है कि हमें सूर्यास्त के बाद के समय कुछ चीजें किसी से लेनी-देनी नहीं चाहिए। दरअसल, संध्याकाल को नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जाओं के मिलन का समय माना गया है।

मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान वातावरण में कुछ सूक्ष्म शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं, इसी कारण घर के अंदर सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए कुछ विशेष कामों को करने से मना किया गया है।

क्यों नहीं करने चाहिए सूर्यास्त के बाद ये 5 काम?

तुलसी तोड़ना: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी में देवी लक्ष्मी का वास होता है। सूर्यास्त के बाद तुलसी को स्पर्श करना या पत्ते तोड़ना उन्हें अपमानित करने के समान है। वास्तु के अनुसार, इस समय तुलसी आराम की मुद्रा में होती हैं। इसलिए उन्हें तोड़ना घर में दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा को निमंत्रण देता है।

झाड़ू लगाना: सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू लगाने को बहुत अशुभ माना गया है। लोक मान्यता है कि इस समय घर की सफाई करने से लक्ष्मी घर से बाहर चली जाती हैं, जिससे धन की हानि होती है। अगर सफाई करना बहुत जरूरी हो, तो कचरा घर के बाहर न फेंकें, उसे रात भर घर में ही रहने दें।

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दही देना (दान करना): दही का संबंध शुक्र ग्रह से है, जो ऐश्वर्य और सुख का कारक माना जाता है। सूर्यास्त के बाद किसी को भी दही देना या उधार देना शुक्र को कमजोर करता है। इससे घर की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है और सुख-शांति में कमी आती है।

सोने की मनाही: वास्तु के अनुसार, सूर्यास्त के समय या ठीक बाद सोना स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति में बाधक है। माना जाता है कि जो व्यक्ति शाम के वक्त सोता है, उसके घर में रोग व आलस का वास होने लगता है।

पूजा-पाठ न करें: शाम के समय दीपक जलाना शुभ है, लेकिन सूर्यास्त के बाद अगर आप भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करते हैं या फिर उनकी सेवा-पूजा करते हैं तो यह बेहद अशुभ माना जाता है। दरअसल, संध्याकाल में पूजा करना अच्छा है, लेकिन उसके बाद वर्जित माना गया है। माना जाता है कि इस समय ईश्वर विश्राम की स्थिति में होते हैं, इसलिए उन्हें किसी भी रूप से जगाना या व्यवधान डालना उचित नहीं है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।