Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    आप जो खा रहे हैं वो शुद्ध है या जहर? पैक्ड पानी में जीवाणु और मुरब्बे में खतरनाक तत्व

    Updated: Fri, 08 May 2026 09:56 PM (IST)

    फर्रुखाबाद में खाद्य पदार्थों में बड़े पैमाने पर मिलावट का खुलासा हुआ है, जिसमें 356 नमूनों में से 114 अमानक पाए गए और 13 में खतरनाक मिलावट मिली। खोवा ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद। शासन की ओर से मिलावट के खिलाफ सख्ती व खाद्य सुरक्षा विभाग के लगातार चलने वाले प्रवर्तन अभियान के बावजूद मिलावट खोर आमजन की सेहत से खिलवाड़ से बाज नहीं आ रहे हैं। हाल ही में प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्टों के अनुसार जनपद में 356 नमूनों में से 114 अमानक पाए गए। वहीं खोवा, पनीर, पानी, मसाले और मुरब्बा तक के 13 नमूनों में मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मिलावट पाई गई है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रयोगशाला की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार जनपद से प्राप्त 356 नमूनों में से 114 नमूने अमानक पाए गए। इनमें छह मामलों में नियमों का उल्लंघन मिला, जबकि 13 नमूनों में गंभीर मिलावट और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक तत्व पाए गए हैं। विभाग अब इन मामलों में सहायक मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। शेष 120 मामलों में एडीएम कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा।


    रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक गड़बड़ी खोवा में मिली। चार नमूनों में बीआर रीडिंग (ब्यूटायरो रिफ्रैक्टोमीटर रीडिंग-निर्धारित सीमा से अधिक या कम मिलती है, तो उसमें बाहरी वसा की मिलावट मानी जाती है) निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई, जबकि दो में बाहरी वसा की अधिक मिलावट भी सामने आई। पनीर के दो नमूनों में भी बीआर रीडिंग निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। घी के एक नमूने में सैपोनिफिकेशन और रिचेर्ट वैल्यू तय मानक से कम मिली, जिससे उसकी शुद्धता पर सवाल उठे हैं।

    सैपोनिफिकेशन वैल्यू से पता लगाया जाता है कि घी या तेल में मौजूद वसा की गुणवत्ता कैसी है। इसी प्रकार रिचेर्ट वैल्यू पता चलता है कि घी में प्राकृतिक दुग्ध वसा कितनी है। चिंताजनक स्थिति पैकेज्ड पेयजल में भी सामने आई। एक नमूने में यीस्ट, मोल्ड और कोलीफार्म बैक्टीरिया पाए गए। यह बैक्टीरिया का एक समूह होता है, जो आमतौर पर गंदे पानी, मिट्टी, मानव या पशुओं के मल में पाया जाता है। हालांकि संबंधित पैकैज्ड पेयजल यूनिट को नियमों के उल्लंघन में सील कर इसका लाइसेंस छापे के बाद ही निरस्त कर दिया गया था।

    खबरें और भी


    वहीं लाल मिर्च पाउडर और कचरी में सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल मिला। विशेषज्ञों के अनुसार सूडान-2 और टार्ट्राजीन जैसे रंग लंबे समय तक सेवन करने पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। करौंदे के मुरब्बे में भी कृत्रिम रंग की मिलावट पाई गई। अभिहित अधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि विभाग लगातार प्रवर्तन अभियान चला रहा है। बीते वित्तीय वर्ष में 1964 निरीक्षण किए गए और 297 विशेष छापेमारी अभियानों में 320 नमूने जांच को भेजे गए। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में अपर जिलाधिकारी न्यायालय से 103 मिलावटखोर व्यापारियों पर 27.17 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

     13 गंभीर मिलावट के मामलों का विवरण

    क्रमांक विक्रेता का नाम खाद्य पदार्थ विक्रय स्थल
    1 समर सिंह खोया चिलाका, कायमगंज
    2 करन खोया चिलसरा रोड, ढुईया, फर्रुखाबाद
    3 प्रमोद कुमार खोया खोया मंडी चौक
    4 विनोद कुमार गुप्ता खोया चौक खोया मंडी
    5 धीरज Kumar पनीर बघार नाला मोड़
    6 संतराम पनीर हरसिंहपुर हुसैनपुर
    7 विनोद कुमार गुप्ता घी छोटी जेल चौराहा
    8 रितिक यादव पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर लैन गांव फतेहगढ़
    9 आक्षांश कटियार लाल मिर्च पाउडर बिजाधारपुर सेंट्रल जेल
    10 सुमित कुमार सक्सेना कचरी ग्राटगंज, फर्रुखाबाद
    11 दीपक राठौर कचरी पुरानी गल्ला मंडी, कायमगंज
    12 अरविंद सक्सेना कचरी ग्राटगंज, फर्रुखाबाद
    13 शुभम शाक्य करौंदे का मुरब्बा टिलिया, मऊदरवाजा
    खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए नमूनों में गंभीर मिलावट मिलने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई।
     

    यह भी पढ़ें- झांसी-कानपुर हाईवे पर उकासा टोल पर एक किमी लंबा जाम, राहगीर परेशान

    यह भी पढ़ें- कानपुर मेट्रो के लिए 350 करोड़ का फंड: KDA समेत ये 4 विभाग देंगे पैसा, इन इलाकों में लोगों पर बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ

    यह भी पढ़ें- पनकी से कैंट और नौबस्ता से चकेरी तक मेट्रो, कानपुर में 7 नए रूट 39 नई ट्रेनों के साथ बढ़ेगा नेटवर्क, देखें पूरा रूट मैप