फर्रुखाबाद में गजब लापरवाही; हाइड्रोसील था...इलाज चलता रहा फाइलेरिया का, 2 डॉक्टरों समेत 7 के खिलाफ परिवाद
फर्रुखाबाद में एक मरीज ने डॉक्टरों पर हाइड्रोसील की जगह फाइलेरिया का गलत इलाज करने का आरोप लगाया है। करीब साढ़े तीन साल तक चले इस गलत उपचार के बाद उन् ...और पढ़ें

HighLights
गलत इलाज करने का आरोप लगाकर ली न्यायालय की शरण
साढ़े तीन साल तक चला गलत उपचार, मरीज परेशान
जिला फाइलेरिया/मलेरिया अधिकारी को भी बनाया परिवादी
जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में चिकित्सा लापरवाही का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक मरीज को बीमारी 'हाइड्रोसील' की थी, लेकिन डॉक्टर साढ़े तीन साल तक उसका इलाज 'फाइलेरिया' समझकर करते रहे। 2 डाक्टरों समेत 7 के खिलाफ परिवाद दर्ज किया गया।
फतेहगढ़ के धर्मवीर गौतम ने आरोप लगाया है कि उन्हें समस्या हाइड्रोसील की थी, लेकिन करीब साढ़े तीन साल तक उनका इलाज फाइलेरिया का चलता रहा। उन्होंने तत्कालीन जिला फाइलेरिया/मलेरिया अधिकारी, सरकारी अस्पताल के तत्कालीन डाक्टर व एक प्राइवेट डाक्टर व तीन अज्ञात समेत सात के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दर्ज कराया है।
उन्होंने जाति सूचक गालियां देकर अपमानित करने का भी आरोप लगाया है। परिवादी बनाए गए द केयर हास्पिटल के डा. केएम द्विवेदी ने बताया कि यह मामला पूर्व में एक बार न्यायालय से खारिज हो चुका है। सीएमओ डा. अवनीन्द्र कुमार ने घटनाक्रम उनके कार्यकाल का नहीं है। पता कराया जा रहा है।
धर्मवीर ने बताया कि उन्होंने तीन नवंबर 2019 को आवास विकास स्थित द केयर हास्पिटल में डा. केएम द्विवेदी से मिलकर अपनी समस्या बताई थी। उन्होंने फाइलेरिया की आशंका बताकर लोहिया अस्पताल में डा. गौरव मिश्रा के पास भेज दिया। उन्होंने भी फाइलेरिया की आशंका जताई और जांच कराने के लिए कहा।
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जिला फाइलेरिया/मलेरिया अधिकारी डा. सुजाता ठाकुर के कहने पर वहीं के कर्मचारी श्याम मोहन ने ब्लड सैंपल लिया। इसके बाद फाइलेरिया बताकर तीन वर्ष सात माह तक इलाज करते रहे। अधिक परेशानी होने पर सैफई स्थित उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में दिखाया। वहां जांच में हाइड्रोसील की समस्या निकली।
आपरेशन के बाद उनकी समस्या दूर हुई। इसके बाद उन्होंने सभी के खिलाफ विशेष न्यायालय एससी/एसटी में परिवाद दर्ज कराया है। डा. केएम द्विवेदी ने बताया कि धर्मवीर गौतम ने उन्हें फाइलेरिया की जानकारी दी थी। उन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भेज दिया था।