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    कानपुर के 8 हजार व देश भर के 65,000 आयुध कर्मियों के लिए राहत भरी खबर, रिटायरमेंट तक सुरक्षित रहेगी सरकारी नौकरी

    Updated: Mon, 11 May 2026 09:52 PM (IST)

    कैबिनेट सचिव ने 65 हजार आयुध कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति तक सरकारी कर्मचारी बनाए रखने का आश्वासन दिया है। यह निर्णय आयुध निर्माणियों के निगमीकरण के बा ...और पढ़ें

    आयुध निर्माणी कानपुर। इंटरनेट मीडिया

    आयुध निर्माणी कानपुर। इंटरनेट मीडिया

    HighLights

    1. कैबिनेट सचिव ने सेवानिवृत्ति की तिथि तक सभी आयुध कर्मियों को सरकारी सेवा में बनाए रखने का दिया आश्वासन

    2. कानपुर में आठ हजार सहित देश भर की आयुध निर्माणियों में कार्यरत 65 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं

    विवेक मिश्र, कानपुर। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत देश भर में संचालित सात डीपीएसयू के मुख्यालय और 41 आयुध निर्माणियों में कार्यरत 65 हजार कर्मचारी सेवानिवृत्ति की तिथि तक सरकारी कर्मचारी बने रहेंगे। उनमें अब निगम का कर्मचारी बनने का डर नहीं सताएगा और प्रसार भारती माडल का लाभ मिलेगा। सोमवार को राष्ट्रीय परिषद् जेसीएम प्रथम की बैठक में भारत सरकार के कैबिनेट सचिव ने मांग को जल्द पूरा करने पर सहमति दी।

    वर्ष 2021 में आयुध निर्माणियों के निगमीकरण के बाद से अब तक रक्षा उत्पादन विभाग की ओर से पूर्व में दो साल, एक साल और 15 महीने की प्रतिनियुक्ति यानी डेप्युटेशन की अवधि बढ़ाई जा चुकी है। नियमानुसार से पांच साल से ज्यादा प्रतिनियुक्ति नहीं बढ़ाई जा सकती है। निगमीकरण के बाद रक्षा उत्पादन विभाग के अंतर्गत सात डीपीएसयू म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड, एडवांस वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, एडवांस व्हीकल निगम लिमिटेड, यंत्र इंडिया लिमिटेड, इंडियन आप्टेल लिमिटेड, ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड, ट्रूप कंफर्ट्स लिमिटेड कंपनी के अंतर्गत 41 आयुध निर्माणियां संचालित हैं।

    यहां ग्रुप ए, बी और सी ग्रुप के अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत हैं। विभाग ने कंपनियों को एचआर नीति तैयार करने को कहा था। कंपनियों ने नीति तैयार कर कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों से सुझाव मांगे लेकिन संगठनों ने बहिष्कार कर दिया। इससे ये प्रक्रिया अटकी रही। दिसंबर 2026 में कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म हो रही थी। इससे पहले कंपनियों को विकल्प देना था। लेकिन कंपनियां इसमें असफल रहीं।

    Employees of Ordnance Factories Remain Government Employees

    दैनिक जागरण में 11 सितंबर 2024 को प्रकाशित खबर। 

    मुद्दे को लगातार उठाया गया

    बीपीएमएस के संयुक्त मंत्री योगेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि निगमीकरण की घोषणा के बाद से बीपीएमएस व जीईएनसी कर्मचारियों की सेवा शर्तों, वेतन, भत्तों, पेंशन लाभ और नौकरी की सुरक्षा की पूर्ण सुरक्षा के लिए निरंतर और लगातार संघर्षरत रही। संगठन द्वारा हर आंदोलन कार्यक्रम, संगठनात्मक अभियान और विभिन्न स्तरों पर उच्च अधिकारियों के साथ आयोजित बैठकों में इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर लगातार उठाया। कर्मचारियों की एकजुटता की वजह से अब संघर्ष रंग लाया है।

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    ये थी मांग

    बीपीएमएस कार्यकारी अध्यक्ष मुकेश सिंह नेे कहा कि कैबिनेट सचिव से मिला आश्वासन केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि हजारों कर्मचारियों एवं उनके परिवारों की सेवा सुरक्षा, वेतन, भत्तों, पेंशन व सम्मान की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जेसीएम तृतीय के सचिव साधू सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय परिषद जेसीएम की बैठक में कैबिनेट सचिव द्वारा दिया गया आश्वासन कर्मचारियों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआइडीईएफ) के संगठन मंत्री सौरभ सिंह ने कहा कि महासंघ ने साहसपूर्वक इस मुद्दे को उठाया और मामले को उच्च न्यायालय तक पहुंचाया। अब जाकर राहत मिलने की उम्मीद जगी है।


    ये है प्रसार भारती माडल

    प्रसार भारती के निगमीकरण के बाद वहां के कर्मचारियों को गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से सेवानिवृत्ति की तिथि तक सरकारी बनाए रखने का आदेश जारी हुआ था। जिससे वेतन भत्ते, पेंशन आदि वित्तीय अधिकार सुरक्षित हो गए थे। इसी को आधार बनाकर बीपीएमएस ने दिल्ली उच्च न्यायालय में मुकदमा दायर किया था जिसमें 202 में आए निर्णय में न्यायालय ने कर्मचारियों की सरकारी सेवा शर्तों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था। इन दो आधार पर बीपीएमएस ने आयुध कर्मचारियों को भी प्रसार भारती माडल की तरह सरकारी दर्जा दिए जाने की मांग रखी थी।

    दैनिक जागरण ने प्रकाशित की थी प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ने की खबर

    सात डीपीएसयू के मुख्यालय और 41 आयुध निर्माणियों में कार्यरत करीब 70 हजार आयुध कर्मचारियों में निगमीकरण के बाद प्रतिनियुक्ति पर रखा गया था। सभी कर्मचारियों को निगम का कर्मचारी बनने के लिए डर सता रहा था। दैनिक जागरण ने 11 सितंबर 2024 को 15 माह के लिए प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ने की खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद कर्मचारी नेताओं द्वारा किए गए धरना प्रदर्शन और बैठकों की भी खबर प्रकाशित की गई।

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