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    kanwar yatra: 63 साल के दुर्गादास की 40 साल की साधना: दो बेटों और पोते के साथ एक बार फिर लाए कांवड़

    By Anand Prakash Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Sat, 08 Aug 2026 05:09 PM (IST)

    Kanwar Yatra 2026: मेरठ में एक परिवार की तीन पीढ़ियां एक साथ कांवड़ यात्रा कर रही हैं, जिसमें 63 वर्षीय दुर्गादास कन्नौजिया 40वीं बार हरिद्वार से कांव ...और पढ़ें

    अपने दो पुत्रों व पौत्र के साथ कांवड़ ला रहे रजबन निवासी दुर्गादास कन्नौजिया। सौ. स्वजन

    अपने दो पुत्रों व पौत्र के साथ कांवड़ ला रहे रजबन निवासी दुर्गादास कन्नौजिया। सौ. स्वजन

    HighLights

    1. पुनीत 20वीं बार पिता के साथ और पौत्र दिशांत दूसरी बार कांवड़ ला रहे।

    2. मेरठ के रजबन मुहल्ले का परिवार, तीन पीढ़ियां एक साथ कांवड़ यात्रा में।

    आनंद प्रकाश, मेरठ। कांवड़ यात्रा से न सिर्फ श्रद्धा, आस्था और आराधना का भाव जागृत हो रहा है, बल्कि भक्ति संस्कारों काे नई पीढ़ी में पहुंचाने का माध्यम भी है। भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था रखने वाले ऐसे अनेक श्रद्धालु कांवड़ ला रहे हैं, जो अपने साथ परिवार के सदस्यों को भी लेकर चल रहे हैं। ऐसा ही एक परिवार है रजबन मुहल्ले का रहने वाला, जिसकी तीन पीढ़ी एक साथ कांवड़ ला रही है।

    परिवार के मुखिया ने भक्ति की इस अमरबेल की नींव रखी और वह 40वीं बार हरिद्वार से कांवड़ ला रहे हैं। अन्य भी ऐसे कई लोग हैं, जो श्रावण मास में 40 से ज्यादा बार कांवड़ लाकर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर चुके हैं।

    रजबन मुहल्ला में फुटबाल मैदान के निकट रहने वाले 63 वर्षीय दुर्गादास कन्नौजिया कैंट बोर्ड से सेवानिवृत हैं। वह वर्ष 1984 में पहली बार चाची सुंदर देवी के साथ कांवड़ लाए थे, तभी से यह सिलसिला आरंभ हो गया। हर साल श्रावण मास में हरिद्वार से पवित्र गंगाजल के साथ कांवड़ लाते हैं।

    इस बार बुधवार की शाम को वह अपने बड़े पुत्र पुनीत, छोटे पुत्र सौरभ कन्नौजिया व 13 वर्षीय पौत्र दिशांत के साथ छोटा हाथी वाहन में सवार होकर हरिद्वार गए। वहां से पवित्र गंगाजल लेकर हर-हर महादेव और बोल बम-बम का जयघोष करते हुए मेरठ की तरफ लौट रहे हैं।

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    उनके भतीजे शुभम कन्नौजिया ने बताया कि पुनीत 20वीं बार पिता के साथ कांवड़ ला रहे हैं, तो पौत्र दिशांत दूसरी बार गया है। वह वाहन में खाने का सामान साथ लेकर चलते हैं, शिविरों में ठहराव बहुत कम करते हैं। दुर्गादास ने बताया कि पौत्र दिशांत भी बगैर किसी परेशानी के पदयात्रा में शामिल है। उन्हें इस बात की खुशी है कि तीन पीढ़ी एक साथ कांवड़ ला रही हैं।

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    ये भी ला चुके 40 बार कांवड़

    रजबन में ही रहने वाले 65 वर्षीय राजेन्द्र उर्फ मुन्ना भाई 40 बार कांवड़ ला चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1980 में पहली बार ट्रेन से हरिद्वार गए थे और कांवड़ लाकर औघड़नाथ मंदिर में भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया था।
    अब पिछले दो साल से कांवड़ नहीं ला रहे हैं। वह बताते हैं कि पहले कांवड़ यात्रा मार्ग पर इतने शिविर नहीं लगते थे, पुलिस-प्रशासन भी खास व्यवस्था नहीं करता था, लेकिन अब पूरा कांवड़ मार्ग सेवाभाव के कार्यों से शिवमय हो जाता है।

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    इन्हीं की तरह डाक विभाग से सेवानिवृत रजबन निवासी अनिल साहू वर्ष 1973 से लगातार हर साल श्रावण मास में कांवड़ लाते रहे और 40 से ज्यादा बार हरिद्वार से पदयात्रा कर चुके हैं। अब स्वास्थ्य समस्या के चलते कांवड़ लेने नहीं जा पा रहे हैं।

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