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नोएडा में लिव-इन रिलेशनशिप से बढ़ता खतरा, हर माह सामने आ रहे 20 से 30 आपराधिक मामले; युवतियां बन रहीं शिकार

Published: Wed, 08 Apr 2026 09:21 AM (IST)Updated: Wed, 08 Apr 2026 11:15 AM (IST)

नोएडा में पढ़ाई और नौकरी के लिए आने वाली युवतियों के बीच लिव-इन रिलेशनशिप चिंता का विषय बन रहे हैं। ...और पढ़ें

वन स्टॉप सेंटर के अनुसार, शहर में हर महीने 20 से 30 लिव-इन रिलेशनशिप के मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें अधिकतर बाहर से आए युवाओं के हैं।

वन स्टॉप सेंटर के अनुसार, शहर में हर महीने 20 से 30 लिव-इन रिलेशनशिप के मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें अधिकतर बाहर से आए युवाओं के हैं।

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संक्षेप में पढ़ें

स्वाति भाटिया, नोएडा। पढ़ाई और नौकरी के बेहतर अवसरों के चलते बड़ी संख्या में युवा, खासकर युवतियां, नोएडा आ रही हैं। मगर नए शहर की आजादी और अकेलेपन के बीच बन रहे रिश्ते अब चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। वन स्टॉप सेंटर के अनुसार, शहर में हर महीने 20 से 30 लिव-इन रिलेशनशिप के मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें अधिकतर बाहर से आए युवाओं के हैं।

काउंसलिंग टीम का कहना है कि घर से दूर रहने, भावनात्मक सहारे की तलाश और सोशल मीडिया के जरिए बनी नजदीकियां युवाओं को जल्दी फैसले लेने के लिए प्रेरित करती हैं। लेकिन जब ये रिश्ते जिम्मेदारियों और हकीकत से टकराते हैं, तो हालात बिगड़ने लगते हैं और कई युवतियां मानसिक तनाव व असुरक्षा का सामना करती हैं।

आंकड़ों दर्शा रहे चिंता का स्तर

  • हर माह कुल केस: 20–30
  • 18–22 वर्ष आयु वर्ग: 12–17 मामले
  • शादीशुदा महिलाओं के केस: 4–5
  • नाबालिग लड़कियां: 1–2 मामले
  • परिवार द्वारा अपनाए गए केस: 90%
  • परिवार द्वारा ठुकराए गए केस: 10%

केस 1: कोचिंग, दोस्ती और फिर टूटता भरोसा

21 वर्षीय युवती बड़े सपनों के साथ नोएडा कोचिंग के लिए आई थी। शुरुआत में सब सामान्य था, लेकिन पीजी में रहने के दौरान उसकी मुलाकात एक युवक से हुई। दोनों के बीच दोस्ती गहरी हुई और उसने उस पर भरोसा कर उसके साथ रहने का फैसला कर लिया। कुछ समय बाद जब खर्चों और जिम्मेदारियों को लेकर विवाद शुरू हुए, तो रिश्ता धीरे-धीरे टूटने लगा। युवक का व्यवहार बदल गया और युवती खुद को अकेला महसूस करने लगी। मानसिक तनाव के बीच वह वन स्टाप सेंटर पहुंची, जहां काउंसलिंग के बाद उसने हिम्मत जुटाई और खुद को उस स्थिति से बाहर निकालकर पढ़ाई पर दोबारा ध्यान देना शुरू किया।

केस 2: ऑनलाइन प्यार का जाल

22 वर्षीय युवती की दोस्ती एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर हुई। युवक ने खुद को जिम्मेदार और सहारा देने वाला बताया। भरोसे में आकर युवती उसके साथ रहने लगी, लेकिन कुछ ही महीनों में सच्चाई सामने आने लगी। व्यवहार में बदलाव, झगड़े और असुरक्षा ने उसे तोड़ दिया। मामला बढ़ने पर वह वन स्टॉप सेंटर पहुंची, जहां टीम ने हस्तक्षेप कर उसे सुरक्षित बाहर निकाला और परिवार से जोड़ने की कोशिश की।

केस 3: गुस्सा बड़ा खतरा

17 वर्षीय लड़की घर में छोटी सी बात पर नाराज होकर निकल गई। बिना सोचे-समझे वह एक युवक के संपर्क में आ गई और नोएडा पहुंच गई। हालात बिगड़ते देख मामला सेंटर तक पहुंचा। काउंसलिंग के दौरान लड़की भावुक हो गई और अपनी गलती स्वीकार की। समय रहते उसे सुरक्षित परिवार के पास भेज दिया गया, जिससे एक बड़ा खतरा टल गया।

केस 4: शादी से दूर, फिर बच्चों की याद ने बदला फैसला

28 वर्षीय शादीशुदा महिला, जो दो बच्चों की मां थी, वैवाहिक तनाव से परेशान होकर एक परिचित के साथ लिव-इन में रहने लगी। शुरुआत में उसे यह फैसला सही लगा, लेकिन धीरे-धीरे बच्चों की याद और समाज का दबाव उस पर हावी होने लगा। काउंसलिंग के दौरान वह कई बार भावुक हुई और अंततः उसने अपने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए परिवार में लौटने का निर्णय लिया।

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