विचार: मजबूत होता भारत का सुरक्षा कवच
भारतीय जनसंघ ने अपने 1964 के पटना अधिवेशन में प्रस्ताव पारित करते हुए मांग की थी कि भारत को परमाणु बम बनाने के सभी प्रयत्न करने चाहिए। “सिद्धांत एवं नीतियां” नामक दस्तावेज में भी परमाणु अस्त्रों का निर्माण करने की बात की थी।
HighLights
रक्षा बजट में तीन गुना वृद्धि, स्वदेशी उत्पादन में 174% उछाल।
भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात करता है।
सीडीएस की नियुक्ति, राफेल जैसे आधुनिक शस्त्रों की खरीद।
शिवप्रकाश। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भाजपा संकल्प से सिद्धि अभियान चला रही है। भारत सहित विश्व की अनेक संस्थाओं एवं प्रमुख व्यक्तियों ने इसकी सफलता की प्रशंसा की है। रक्षा क्षेत्र में भी सरकार की उपलब्धियां ऐतिहासिक हैं। चाणक्यनीति में कहा कि “शस्त्रेण रक्षिते राष्ट्रे शास्त्र चिंता प्रवर्तते” शास्त्रों की चर्चा भी तभी संभव है जब राष्ट्र सभी प्रकार से सुरक्षित हो। सिद्धांत कितना भी श्रेष्ठ हो उसकी सफलता उस सिद्धांत का अनुसरण करने वालों की शक्ति पर ही निर्भर करती है। इसी कारण विद्वानों ने शक्ति को ही शांति का आधार बताया है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर अपनी कविता "क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो" इस सिद्धांत को ही प्रतिपादित करते हैं।
भारतीय जनसंघ ने अपने 1964 के पटना अधिवेशन में प्रस्ताव पारित करते हुए मांग की थी कि भारत को परमाणु बम बनाने के सभी प्रयत्न करने चाहिए। “सिद्धांत एवं नीतियां” नामक दस्तावेज में भी परमाणु अस्त्रों का निर्माण करने की बात की थी। प्रस्ताव प्रतिपादन करते समय कहा गया था कि हमारे आराध्य सभी देवी-देवता धर्म संस्थापना के लिए शस्त्रधारी हैं। इसलिए भारत माता भी परमाणु बम धारी होनी चाहिए। इसी नीति का अनुसरण करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने 1999 में पोखरण परमाणु विस्फोट कर विश्व में भारत के सम्मान को बढ़ाने का कार्य किया था। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद देश अपने हितों की सुरक्षा करने में समर्थ बने इस प्रकार की नीति पर चला। आतंकवाद के प्रति जीरो टालरेंस की नीति इसी का उदाहरण है।
रक्षा क्षेत्र का बजट वित्त वर्ष 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपये था, अब 2025-26 के लिए वह बढ़कर 6.81 लाख करोड़ रुपये अर्थात तीन गुना से अधिक हो गया। व्यक्तिगत सैनिक स्तर पर सैनिकों को अब स्वदेशी रूप से निर्मित उच्च गुणवत्ता वाली बुलेटप्रूफ जैकेट, उन्नत हेलमेट, नई बैटल ड्रेस यूनिफार्म, नाइट विजन डिवाइस और थर्मल इमेजर उपलब्ध कराई जा रही है। मोदी सरकार के आने के बाद सेना के समन्वय के लिए लंबित मांग सीडीएस की नियुक्ति का निर्णय हुआ। आपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं के समन्वय में हमने इस निर्णय की भूमिका को अनुभव किया। शस्त्रों की खरीद के लंबे समय से लंबित निर्णयों का भी शीघ्र निस्तारण होते हुए हम देख चुके हैं। फ्रांस से आने वाले राफेल की खरीद इसी प्रक्रिया का परिणाम है। एस-400, सुखोई-30, इजरायल से ड्रोन, हैमर मिसाइल, चिनूक हेलीकाप्टर, एलसीएच प्रचंड (लाइट कांबैट हेलीकाप्टर), तेजस फाइटर जेट (पूर्ण स्वदेशी विमान), पिनाका राकेट सिस्टम (मल्टी बैरल राकेट लॉन्चर), वरुणास्त्र (एंटी सबमरीन मिसाइल) आदि की उपलब्धता के कारण भारतीय सेना विश्व की श्रेष्ठतम सेनाओं में गिनी जाने लगी है।
11 वर्ष के सफलतम कालखंड में केवल विदेश से शस्त्र खरीद ही नहीं, हमने स्वयं के आत्मनिर्भर होने के मंत्र को भी पहचाना है। अब हम भारत में उन्नत एवं आधुनिक स्वदेशी शस्त्रों का निर्माण भी कर रहे हैं। स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत का निर्माण, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, रुस्तम यूएवी ड्रोनस का डीआरडीओ द्वारा लखनऊ में निर्माण, रूस के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, राफेल के मुख्य भाग का हैदराबाद में हम निर्माण करने वाले हैं। रक्षा उत्पादन में पिछले 10 वर्षों में 174 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 में 46529 करोड़ रुपये की तुलना में 2023-24 में 127265 करोड़ रुपये हुआ है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नीति के कारण अब हम खरीदने अर्थात आयात करने वाले देश नहीं हम बेचने वाले अर्थात निर्यात करने वाले देश बन गए हैं। आज हम लगभग 80 से अधिक देशों में रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहे हैं। आपरेशन सिंदूर में हमारे स्वदेशी शस्त्रों की सफलता को देखकर विश्व में हमारे शस्त्रों की मांग भी बढ़ गई है। देश को माओवाद मुक्त करने के मोदी सरकार के संकल्प ने देश के सामान्य नागरिकों में सरकार के प्रति विश्वास जगाया है।
गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए 2022 में कोच्चि में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नौसेना के नए ध्वज का अनावरण किया, जिसमें औपनिवेशिक 'सेंट जार्ज क्रास' को हटाकर छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा से प्रेरित अष्टकोणीय प्रतीक को स्थान दिया गया। इसमें अशोक स्तंभ, लंगर और नौसेना का आदर्श वाक्य “शं नो वरुणः” अंकित है, जो भारत की समुद्री विरासत और आत्मगौरव का प्रतीक है। नए भारत का संकल्प-घर में घुसकर आतंकियों को मारेंगे केवल कहना मात्र नहीं, सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक एवं आपरेशन सिंदूर में हमने यह करके दिखाया है। खून एवं पानी एक साथ नहीं बहेगा, सिंधु नदी समझौता रद कर हमने आतंक के प्रति अपने दृष्टिकोण को विश्व के सामने स्पष्ट किया है। पूर्व सैनिकों के कल्याण, अग्निवीर योजना, विजयदशमी पर राफेल जैसे शस्त्रों का पूजन एवं दीपावली त्योहार में सैनिकों के बीच प्रधानमंत्री मोदी जी की उपस्थिति, सीमावर्ती सैनिक चौकियों पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जी का प्रवास- ये सभी उपक्रम हमारे सुरक्षित भारत के संकल्प को प्रकट करते हैं।
(राष्ट्रीय सह महामंत्री (संगठन), भाजपा )


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