संपादकीय: विकास की सप्तधारा
प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से विकसित भारत के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और 'सप्तधारा' का खाका प्रस्तुत किया। इसमें एक करोड़ युवाओं को एआई प्रशिक्षण और छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग जैसी नई पहलें शामिल हैं, जिनके सफल क्रियान्वयन में केंद्र-राज्य सहयोग महत्वपूर्ण है।
HighLights
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत हेतु 'सप्तधारा' का खाका दिया।
एक करोड़ युवाओं को एआई प्रशिक्षण, ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा।
योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में केंद्र-राज्य सहयोग आवश्यक।
लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जो कुछ कहा और जिन नए कार्यक्रमों की घोषणा की, उनसे देश को विकसित बनाने की उनकी प्रतिबद्धता ही प्रकट होती है। इस अवसर पर उन्होंने जिस तरह देश के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का भी उल्लेख किया, उससे यह पता चलता है कि समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकता में है। ऐसा होना भी चाहिए, लेकिन यही प्राथमिकता केंद्रीय सत्ता के प्रशासन की भी होनी चाहिए।
इतना ही नहीं, इस मामले में राज्य सरकारों को भी केंद्र सरकार के साथ सहयोग करना होगा। यह इसलिए आवश्यक है, क्योंकि केंद्र सरकार की अनेक योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य सरकारों और उनके प्रशासन की महती भूमिका होती है। देश को विकसित बनाने का लक्ष्य तब पूरा होगा, जब केंद्र और राज्य एक टीम की तरह काम करेंगे। अभी कई बार इसका अभाव दिखता है।
देश को विकसित बनाने के लिए केवल यह आवश्यक नहीं कि समस्याओं की सही तरह पहचान हो। आवश्यक यह भी है कि उनके समुचित समाधान के तौर-तरीके विकसित किए जाएं। ऐसा तब होगा, जब सरकारी योजनाओं के अनुपालन में विश्वस्तरीय मानकों और गुणवत्ता को अपनाया जाएगा। अभी ऐसा नहीं हो पा रहा है और इसीलिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं अपेक्षित नतीजे नहीं दे पा रही हैं।
इस बार लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने जो घोषाणाएं कीं, उनमें प्रमुख हैं एक करोड़ युवाओं को एआई का प्रशिक्षण देना और छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराना। ये दोनों पहल सराहनीय और समय की मांग के अनुरूप हैं, लेकिन क्या सरकारी कोचिंग निजी कोचिंग संस्थानों के दबदबे को कम कर पाएगी? प्रश्न यह भी है कि कहीं युवाओं को दिए जाने वाले एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम का हश्र कौशल विकास जैसा तो नहीं होगा?
लाल किले से प्रधानमंत्री ने अगली पीढ़ी के सुधारों को लेकर शक्ति की सप्तधारा का जो उल्लेख किया, वह एक तरह से विकसित भारत के लक्ष्य को पाने का खाका है। इसका उद्देश्य देश की क्षमता का पूरा उपयोग करना है। सप्तधारा की पहली शक्ति मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता, दूसरी शक्ति कृषि एवं खाद्य उत्पादन, तीसरी शक्ति प्रौद्योगिकी एवं नवाचार और चौथी शक्ति गति शक्ति है। इसका आशय कनेक्टिविटी से है।
सप्तधारा की पांचवीं शक्ति रक्षा शक्ति, छठी शक्ति ग्रीन इकोनॉमी-ब्लू इकोनॉमी और सातवीं शक्ति देश की साफ्ट पावर है। इन सभी शक्तियों को बल तब मिलेगा, जब उनके इस्तेमाल में समाज के हर हिस्से की हिस्सेदारी होगी। इससे ही असमान विकास की समस्या का निदान होगा। अच्छा होगा कि इन शक्तियों का उपयोग नैतिक बल के साथ किया जाना सुनिश्चित किया जाए।







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