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    26 लाशों के बोझ तले दबा है बैसरन का 'मिनी स्विट्जरलैंड', देवदार के साए में दम तोड़ रही है कश्मीर की टूरिज्म इकॉनमी

    By Naveen NawazEdited By: Rahul Sharma
    Updated: Tue, 21 Apr 2026 03:57 PM (IST)

    एक साल पहले आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद पहलगाम का बैसरन 'मिनी स्विट्जरलैंड' अभी भी बंद है, जिससे कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था प्रभावित हो र ...और पढ़ें

    मई में खुल सकती है बैसरन घाटी। फाइल फोटो।

    मई में खुल सकती है बैसरन घाटी। फाइल फोटो।

    HighLights

    1. एक साल बाद भी बैसरन 'मिनी स्विट्जरलैंड' बंद।

    2. आतंकी हमले में 26 लोगों ने जान गंवाई थी।

    3. कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा।

    नवीन नवाज, श्रीनगर। एक वर्ष बाद पहलगाम...। जब सुबह सूरज पहाड़ों की ओट से निकलकर अपनी लालिमा बिखेरता है तो वादियां जीवंत हो जाती हैं। पंछी चहचहाने लगते हैं और कलकल बहती लिद्दर नदी के किनारे बने सेल्फी प्वायंट पर सैलानियों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है, लेकिन पहाड़ी पर देवदार के पेड़ों से घिरा बैसरन का मैदान अभी मायूस और विरान है।

    वह इंतजार कर रहा है कि पर्यटक आएं और वहां का सन्नाटा टूटे। फिलहाल, बैसरन देखने की चाहत में कुछ पर्यटक इस तरफ आते हैं, लेकिन आधे रास्ते से ही उसे निहारकर लौट जाते हैं।

    पिछले वर्ष 22 अप्रैल को आतंकी हमले से बैसरन इंसानियत के खून से लाल हो गया था। अभी तक उसे पर्यटकों के लिए खोला नहीं गया है। इस हमले में 25 पर्यटकों और एक घोड़ेवाले सहित 26 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

    इस हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में 48 पर्यटनस्थलों को सरकार ने सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया था। इनमें अभी भी बैसरन समेत लगभग 20 पर्यटनस्थल बंद हैं। पहलगाम आने वाले पर्यटक ही नहीं, स्थानीय लोग भी इसे खोलने की मांग कर रहे हैं, ताकि कश्मीर के षड्यंत्रकारियों को जवाब मिले सके।

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    शाम बाद बेताब और आरू घाटी में जाने पर है रोक

    हमले के बाद सुरक्षा कारणों से पूरे प्रदेश में बंद किए गए पर्यटनस्थलों में से पहलगाम और उसके साथ सटे 13 पर्यटनस्थल पर जाने पर रोक लगी थी। इनमें से पहलगाम के बाद बेताब और आरू घाटी को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। लेकिन शाम चार बजे बेताब और आरू घाटी को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है, जिससे यहां आए पर्यटकों को पहलगाम लौटना पड़ता है। चंदनवाड़ी, दुबयान, शिकारगाह, विमलेश्वर मंदिर, डियर पार्क, लैवेंडर पार्क और अल्पाइन झीलों जैसे अन्य स्थल भी बंद हैं।

    जंगल, पहाड़ और नाले पेश करते हैं कई चुनौतियां

    कई पर्यटन स्थलों को अभी तक न खोले जाने पर कई वरिष्ठ अधिकारी दबे मुंह बताते हैं कि बैसरन व कुछ अन्य की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य पर्यटनस्थलों से भिन्न हैं। यह एक तरह से अंतिम छोर पर है और इसके आसपास के जंगल, पहाड़ और नाले कई चुनौतियां पेश करते हैं। जबकि पहलगाम और उसके आस पास के इलाकों में सुरक्षा बेहद मजबूत है।

    मई में खुल सकती है बैसरन घाटी

    सुरक्षाधिकारियों के अनुसार, बैसरन व उस जैसे कुछ अन्य पर्यटनस्थलों में सुरक्षा का पूरा बंदोबस्त किया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इसे मई में खोला जाएगा, लेकिन अंतिम निर्णय संबंधित सुरक्षा एजेंसियां और केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्तर पर लिया जाएगा।

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    हमले से पहले की तुलना में आधे पर्यटक आ रहे

    पहलगाम विकास प्राधिकरण के सीईओ मीर नसरुल हिलाल ने कहा कि पहलगाम में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस बार विंटर फेस्टिवल, कपल रेस, स्प्रिंग फेस्टिवल का आयोजन किया गया था। पहलगाम हमले से पहले की तुलना में अब करीब आधे पर्यटक आ रहे हैं। लेकिन इनकी संख्या बढ़ रही है। तीन जुलाई से श्री अमरनाथ यात्रा भी शुरू हो रही है, ऐसे में सैलानी और बढ़ेंगे। लेकिन बैसरन को बंद रखे जाने के मुद्दे पर वह भी चुप्पी साध जाते हैं और कहते हैं कि वहां सड़क नहीं है, मौसम अभी साथ नहीं दे रहा है।

    खोला जाए बैसरन

    पहलगाम पौनी ऐसोसिएशन के मौजूदा प्रधान रौफ वानी ने कहा कि पर्यटकों को हमारे साथी बैसरन से लगभग दो तीन किलोमीटर पहले एक शिविर तक ले जाते हैं। पौनी एसोसिएशन के पूर्व प्रधान अब्दुल वहीद व एक स्थानीय युवक रईस अहमद ने कहा कि पहलगाम में जितनी रौनक है, बैसरन में उतनी ही विरानी छाई है। अब हालात ठीक हैं, इसे खोला जानी चाहिए। हमारी आजीविका पर्यटन से जुड़ी है।