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    अपमान का बदला लेने की सनक: 2 लाख के इनामी विश्वनाथ मंडल ने उगला DD Bar हत्याकांड का पूरा सच

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 11:03 PM (IST)

    जमशेदपुर के डीडी बार हत्याकांड में मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा ने पुलिस रिमांड में पूरी साजिश का खुलासा किया है। ...और पढ़ें

    हिमांशु सिंह हत्‍याकांड की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    हिमांशु सिंह हत्‍याकांड की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    HighLights

    1. मुख्य आरोपी बोदरा ने पुलिस रिमांड में साजिश कबूली।

    2. साथियों के अपमान का बदला लेने को की थी हत्या।

    3. हथियारबंद गुर्गों को बुलाकर हिमांशु पर किया हमला।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। बिष्टुपुर स्थित डीडी बार के सामने 27 जून को हुए चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड और उनके मित्र प्रत्युष पर हुए जानलेवा हमले के मामले में नए और खौफनाक खुलासे सामने आए हैं। 
     
    अदालत में आत्मसमर्पण करने वाले दो लाख रुपये के इनामी मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा ने पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में पूरी साजिश की परतें खोल दी हैं। 
     
    बोदरा ने स्वीकार किया कि बार के बाहर मारपीट के दौरान साथियों के अपमान के बाद उसने मौके पर ही हिमांशु और उसके साथियों को जान से मारने का मन बना लिया था।
     

    अपमान का बदला लेने के लिए बुलाए हथियारबंद गुर्गे

    पुलिस रिमांड में बोदरा ने बताया कि घटना वाले दिन डीडी बार के बाहर हिमांशु सिंह और उसके साथियों के साथ उनके पक्ष का विवाद हुआ था। 
     
    संख्या कम होने के कारण बोदरा के साथियों की जमकर पिटाई हो गई, जिससे वे खुद को अपमानित महसूस कर रहे थे। इसी का बदला लेने के लिए उसने तुरंत योजना बनाई।
     
    उसने सबसे पहले अपनी अवैध शराब भट्ठी में काम करने वाले लखिंद्र को फोन किया, लेकिन कॉल न उठने पर अमित लोहार से संपर्क साधा। 
     
    उसने अमित को निर्देश दिया कि लखिंद्र, राज लोहार, अर्जुन लोहार, लखन बिरुआ और गणेश लोहार समेत अन्य साथियों को भट्ठी में रखे हथियारों के साथ तुरंत डीडी बार पहुंचने को कहे।
     

    एंबुलेंस के बहाने पुलिस को बातों में उलझाया

    इसी बीच बिष्टुपुर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और सभी पक्षों को थाने चलने को कहने लगी। बदमाशों ने पुलिस को यह कहकर उलझाए रखा कि उनका साथी सोनू मंडल गंभीर रूप से घायल है और उसके लिए एंबुलेंस बुलाई जा रही है। 
     
    बोदरा का मुख्य मकसद सिर्फ इतना था कि जब तक उसके हथियारबंद साथी मौके पर नहीं पहुंच जाते, तब तक किसी को भी वहां से जाने न दिया जाए।
     
    कुछ ही देर में कार से पहुँचे साथियों ने हथियार निकाले। बोदरा ने स्वयं चाकू लिया और अपने साथी राहुल को चापड़ सौंपते हुए हिमांशु और उसके साथियों पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया।
     

    पीसीआर वाहन के भीतर भी चलाता रहा चाकू

    बोदरा के अनुसार, उसने सबसे पहले हिमांशु सिंह पर हमला किया। जब पुलिस घायल हिमांशु को बचाकर पीसीआर वाहन में बैठा चुकी थी, तब भी अपराधियों का दुस्साहस कम नहीं हुआ। 
     
    बोदरा दौड़कर पीसीआर वाहन के दूसरी ओर से पहुंचा और गाड़ी में बैठे हिमांशु पर ताबड़तोड़ चाकू से वार करने लगा। हिमांशु के वाहन से नीचे गिर जाने के बाद भी वह उसके पेट और शरीर पर हमला करता रहा। 
     

    जंगल में काटी रात, फिर अदालत में किया सरेंडर 

    जब पुलिसकर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की, तो उसने पुलिस टीम पर भी हमला करने का प्रयास किया। वारदात के बाद बोदरा बुलेट से भाग निकला, लेकिन बाइक खराब होने पर उसे चमरिया स्कूल के पास छोड़कर पैदल अलकोर होटल की ओर भागा। 
     
    उसने एक रात चांडिल के जंगलों में बिताई। लगातार पुलिस की दबिश और संपत्ति कुर्की के डर से उसने आखिरकार आठ जुलाई को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। 
     
    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिमांड में मिले बयानों से साजिश में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।

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