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DD Bar Murder Case : बिष्टुपुर में पुलिस वैन से खींचकर युवक की हत्या मामले में NHRC सख्त, डायरी नंबर जारी

Published: Sun, 12 Jul 2026 09:59 PM (IST)

जमशेदपुर में पुलिस की मौजूदगी में हुए जानलेवा हमले में हिमांशु सिंह की मौत का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है।

हिमांशु हत्‍याकांड की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

हिमांशु हत्‍याकांड की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. पुलिस मौजूदगी में हुए हमले का मामला NHRC पहुंचा।

  2. आयोग ने शिकायत स्वीकार कर डायरी नंबर जारी किया।

  3. उच्च स्तरीय जांच, ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी में दो युवकों पर हुए जानलेवा हमले और बाद में करणी सेना सरायकेला युवा जिलाध्‍यक्ष हिमांशु सिंह की मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है। 
 
आयोग ने इस मामले में दायर शिकायत को आधिकारिक तौर पर स्वीकार करते हुए डायरी संख्या 15568/IN/2026 जारी कर दी है। आयोग ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए इसे आगे की प्रक्रिया के लिए दर्ज कर लिया है।
 

पुलिस की मौजूदगी में अनुच्छेद-21 का उल्लंघन

यह शिकायत झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (JHRC) के प्रमुख मनोज मिश्रा द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी गई थी। शिकायत में गंभीर आरोप लगाया गया है कि बिष्टुपुर में पुलिस वैन से दो युवकों को खींचकर अपराधियों ने उन पर बेरहमी से जानलेवा हमला किया।

इस घटना में गंभीर रूप से घायल हिमांशु ने दो दिन बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया, जबकि दूसरा युवक प्रत्युष अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। 
 
मनोज मिश्रा ने शिकायत में कहा क‍ि यदि पुलिस अभिरक्षा या पुलिस की मौजूदगी में किसी नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाती और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है।


उच्च स्तरीय जांच और ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग

मानवाधिकार संगठन ने पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही शिकायत में निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई गई हैं:

  •     दोषियों पर एक्शन: हमलावरों के अलावा घटना के समय लापरवाही बरतने वाले संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। 
  •     मुआवजा: मृतक हिमांशु के आश्रित परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
  •     रोजगार: पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
  •     सुरक्षा व इलाज: गंभीर रूप से घायल दूसरे युवक प्रत्युष के इलाज और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


प्रशासन और पुलिस की बढ़ेगी जवाबदेही

एनएचआरसी द्वारा डायरी नंबर जारी किए जाने को इस मामले में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज मिश्रा का कहना है कि यदि जांच में पुलिस की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

अब इस मामले में सभी की निगाहें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आयोग झारखंड सरकार और पुलिस महानिदेशक से Report तलब करता है, तो यह मामला राज्य में कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर एक गंभीर बहस का विषय बन सकता है।

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