आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल से पके आम? हैदराबाद में 200 किलो स्टॉक जब्त, ऐसे करें असली-नकली की पहचान
गर्मियों का मौसम आते ही 'फलों के राजा' आम का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। ...और पढ़ें

हैदराबाद में 200 किलो नकली आम जब्त, घर बैठे ऐसे करें असली आम की पहचान (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मी के मौसम का सबसे बड़ा आकर्षण आम ही होता है। इसे 'फलों का राजा' यूं ही नहीं कहा जाता। जी हां, इसके स्वाद के दीवाने देश-विदेश में हर जगह मौजूद हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार की भारी मांग को पूरा करने के चक्कर में कुछ लालची व्यापारी आम को रातों-रात पकाने के लिए खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल कर रहे हैं? हाल ही में हैदराबाद की एक घटना ने इस ओर सबका ध्यान खींचा है।
(Image Source: Freepik)
हैदराबाद पुलिस का बड़ा खुलासा
गोशामहल पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बाजार में बिकने जा रहे लगभग 200 किलो ऐसे आम जब्त किए हैं, जिन्हें केमिकल के जरिए पकाया गया था।
खाद्य सुरक्षा नियमों के मुताबिक, 20 किलो आम की पेटी में इस केमिकल के अधिकतम 5 पैकेट इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन ज्यादा मुनाफे के लालच में व्यापारी हर पेटी में 6 पैकेट डाल रहे थे। पुलिस ने इस धोखाधड़ी, खाद्य पदार्थों में मिलावट और आम जनता की जान जोखिम में डालने के जुर्म में मामला दर्ज कर लिया है और बाजारों में अपनी निगरानी तेज कर दी है।
आम पकाने को लेकर क्या हैं FSSAI के नियम?
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने साल 2011 के विनियमों के तहत लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए कुछ सख्त नियम बनाए हैं:
- एथिलीन का सुरक्षित इस्तेमाल: फलों को पकाने के लिए एथिलीन गैस का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसकी मात्रा 100 ppm (100µl/L) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
- इन गैसों पर है पूरी पाबंदी: फलों को पकाने के लिए कार्बाइड गैस या एसिटिलीन गैस का इस्तेमाल पूरी तरह से गैरकानूनी है, क्योंकि ये इंसानी शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
एथिलीन गैस क्यों सुरक्षित है?
दरअसल, एथिलीन एक नेचुरल हार्मोन है जो फलों के भीतर स्वाभाविक रूप से बनता है और उन्हें पकने में मदद करता है। इसलिए यह उपभोक्ताओं के लिए खतरनाक नहीं है।
- सीधा संपर्क न हो: फलों को जल्दी पकाने के लिए बाहरी स्रोतों (जैसे इथेनॉल या एथिलीन गैस सिलेंडर) से एथिलीन दी जा सकती है, लेकिन कोई भी ऐसा केमिकल पैकेट या स्रोत फलों के सीधे संपर्क में नहीं आना चाहिए।

खबरें और भी
(Image Source: Freepik)
घर पर कैसे पहचानें केमिकल वाले आम?
बाजार से आम लाने के बाद इन आसान और स्मार्ट तरीकों से उसकी शुद्धता परख सकते हैं:
पानी वाला टेस्ट
यह सबसे आसान तरीका है। आमों को पानी से भरी बाल्टी में डाल दें। अगर वे डूब जाते हैं, तो वे प्राकृतिक रूप से पके हैं, लेकिन अगर वे पानी की सतह पर तैरने लगें, तो समझ जाइए कि उन्हें केमिकल से पकाया गया है।
रंग और दिखावट पर गौर करें
प्राकृतिक आमों का रंग थोड़ा मिला-जुला होता है, जबकि केमिकल वाले आम हर तरफ से एक जैसे पीले या नारंगी दिखते हैं और इनमें एक अजीब-सी चमक भी होती है। इसके अलावा, अगर आम पर केमिकल के इंजेक्शन वाले धब्बे या दाग दिखें, तो ऐसे आम खाने से बचें।
छूकर और सूंघकर देखें
असली आम की खुशबू मीठी और मनमोहक होती है। वहीं, नकली आम से रसायनों की अजीब-सी महक आती है। साथ ही, केमिकल से पके आम छूने में बहुत ज्यादा पिलपिले लगते हैं क्योंकि रसायन उनके अंदर की कोशिकाओं की दीवारों को गला देते हैं।
स्वाद से पहचानें
अगर आम खाने में बेस्वाद लगे, उसका स्वाद कुछ अजीब हो, या उसे खाने के बाद मुंह का स्वाद खराब हो जाए, तो इसका सीधा मतलब है कि इसमें केमिकल की मिलावट है।
बेकिंग सोडा का इस्तेमाल
पानी में थोड़ा-सा बेकिंग सोडा मिलाएं और आमों को 15 से 20 मिनट के लिए उस पानी में छोड़ दें। इसके बाद आमों को निकालकर धो लें। अगर धोने के बाद आम के छिलके का रंग बदल जाता है, तो यह इस बात का संकेत है कि आमों पर केमिकल ट्रीटमेंट या उन्हें चमकाने के लिए पॉलिश की गई है।
