लखनऊ की गलियों में छिपे वो 5 स्वाद, जो अक्सर मिस कर देते हैं टूरिस्ट; एक दिन में ऐसे करें एक्सप्लोर
अगर आप लखनऊ का वो लोकल स्वाद चखना चाहते हैं, जो वहां के रहने वालों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, तो हमने आपके लिए एक खास 'वन डे फूड इटिनरेरी' तै ...और पढ़ें

जरूर चखें नवाबों के शहर लखनऊ की ये मशहूर डिशेज (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नवाबों का शहर लखनऊ सिर्फ अपनी तहजीब और ऐतिहासिक इमारतों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लाजवाब खाने के लिए भी पूरी दुनिया में मशहूर है। जब भी कोई टूरिस्ट यहां आता है, तो वह कुछ गिने-चुने और बड़े नाम वाले रेस्टोरेंट्स में जाकर कबाब और बिरयानी खाकर लौट जाता है।
लेकिन, लखनऊ का असली स्वाद उन बड़ी दुकानों में नहीं, बल्कि पुराने शहर की संकरी गलियों और छोटी-छोटी ठेलियों पर छिपा है। अगर आप लखनऊ की असल रूह को चखना चाहते हैं, तो बिना किसी बड़े नाम के पीछे भागे, एक दिन में इस 'हिडन फूड ट्रेल' को एक्सप्लोर करें।
आइए जानते हैं वो 5 स्वाद (Lucknow Hidden Food Gems) जो अक्सर टूरिस्ट मिस कर देते हैं और आप इन्हें एक दिन में कैसे एन्जॉय कर सकते हैं।

(Image Source: AI-Generated)
सुबह 8 बजे
लखनऊ में सुबह की शुरुआत बेहद चटपटी होती है। जी हां, अगर आपको लगता है कि यहां के लोग नाश्ते में सिर्फ जलेबी खाते हैं, तो आप गलत हैं। पुराने शहर के किसी भी चौराहे पर चले जाइए, आपको गरमागरम खस्ता कचौड़ी छनती हुई मिल जाएगी।
बता दें, यह कोई आम कचौड़ी नहीं है। एकदम कड़क और कुरकुरी कचौड़ी को जब हाथ से फोड़कर उसमें तीखे आलू और सफेद मटर की मसालेदार सब्जी डाली जाती है, तो नींद चुटकियों में उड़ जाती है। इसके साथ मिलने वाली सूखी धनिया और मिर्च की चटनी इसका स्वाद दोगुना कर देती है।
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सुबह 11 बजे
तीखा नाश्ता करने के बाद कुछ मीठा तो बनता है। जैसे ही दिन चढ़ने लगे, आप पुराने लखनऊ की संकरी गलियों का रुख कर सकते हैं। यहां आपको बड़े-बड़े थालों में पीले रंग का एक बादलों जैसा गुबार सजा हुआ दिखेगा।
इसे मलाई मक्खन कहते हैं। इसे बनाने की प्रक्रिया रात में खुले आसमान के नीचे ओस की बूंदों के बीच शुरू होती है। यह इतना हल्का होता है कि मुंह में रखते ही किसी जादू की तरह गायब हो जाता है। इसके ऊपर छिड़का गया केसर, पिस्ता और खोया आपको एक शाही एहसास देगा।

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दोपहर 2 बजे
दोपहर के खाने का वक्त हो और आप पुराने शहर में हों, तो कबाब के अलावा भी एक दुनिया है। गलियों के अंदर झांकेंगे तो कई छोटी-छोटी पुरानी दुकानें मिलेंगी, जहां से मसालों की ऐसी खुशबू आएगी कि आप खुद को रोक नहीं पाएंगे।
धीमी आंच पर रात भर पकाया गया गोश्त मसालों के रस में पूरी तरह डूबा होता है। इसे तंदूर से निकले गरमागरम, मुलायम 'खमीरी कुलचे' के साथ परोसा जाता है। बता दें, यह कुलचा आम नान से बिल्कुल अलग होता है, बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से रुई जैसा मुलायम। यह एक्सपीरिएंस किसी बड़े रेस्टोरेंट के खाने को भी पीछे छोड़ देता है।
शाम 5 बजे
शाम होते ही लखनऊ की सड़कें चाट के ठेलों से सज जाती हैं। टूरिस्ट अक्सर बड़ी दुकानों की 'बास्केट चाट' खाकर खुश हो जाते हैं, लेकिन असली मजा मोहल्ले के बाहर खड़े चाट वाले भइया के पास है।
यहां सफेद मटर को बड़े से लोहे के तवे पर टिक्की की तरह कुरकुरा होने तक सेंका जाता है। इसके ऊपर घर के पिसे हुए भुने मसाले, नीबू का रस, बारीक कटी अदरक और हरी धनिया डालकर पत्तल में दिया जाता है। यकीन मानिए, इसका वो स्मोकी और खट्टा-तीखा स्वाद आपको उंगलियां चाटने पर मजबूर कर देगा।

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रात 8 बजे
दिन भर की थकान मिटाने के लिए, आप रात के वक्त चाय की गुमटियों का रुख कर सकते हैं। जी हां, यहां मिलने वाली 'कश्मीरी चाय' या गुलाबी चाय आम चाय से बिल्कुल अलग होती है।
इसमें दूध, मेवे, और खास चायपत्ती का इस्तेमाल होता है जिससे इसका रंग खूबसूरत गुलाबी हो जाता है। इसे ताजे, नर्म बन के साथ खाया जाता है, जिसके बीच में ढेर सारा सफेद मक्खन लगा होता है। बन-मक्खन का नमकीन स्वाद और गुलाबी चाय की हल्की मिठास, आपके इस एक दिन के सफर को हमेशा के लिए यादगार बना देगी।
ध्यान रहे, लखनऊ की गलियों को एक्सप्लोर करते समय अपनी कार को पीछे छोड़ दें। ई-रिक्शा लें या पैदल घूमें, क्योंकि असली खजाना वहीं मिलता है जहां बड़ी गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं हैं।
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