एक काम से दूसरे पर स्विच करते ही क्यों अटक जाता है कुछ लोगों का दिमाग?
वैज्ञानिकों ने उस न्यूरल सर्किट की पहचान की है, जो दिमाग को एक काम से दूसरे पर स्विच करते समय अटकने से बचाता है। ...और पढ़ें

क्या एक काम से दूसरे काम पर स्विच करते समय आपका दिमाग भी अटक जाता है? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप एक काम से दूसरे काम पर स्विच करते हैं, लेकिन आपका दिमाग कुछ पल के लिए अपने सोचने के पुराने तरीके में ही अटका रहता है?
कई बार तो हम यह महसूस भी कर लेते हैं कि हमारी पुरानी रणनीति अब काम नहीं आ रही है, फिर भी हमारा मन बार-बार उसी पुरानी तरकीब पर लौटता रहता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो अब वैज्ञानिकों ने इसके पीछे की वजह ढूंढ ली है।
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने हाल ही में दिमाग के एक ऐसे न्यूरल सर्किट की पहचान की है, जो इस पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा विज्ञान क्या है।

(Image Source: AI-Generated)
'बौद्धिक लचीलापन' क्या है?
तंत्रिका विज्ञानियों के अनुसार, खुद को नई परिस्थितियों के अनुकूल ढालने और अपनी रणनीति को तुरंत बदलने की इस क्षमता को "बौद्धिक लचीलापन" कहा जाता है।
यह हमारे दिमाग की एक बेहद उच्च और महत्वपूर्ण संज्ञानात्मक खूबी है। इसी लचीलेपन के कारण हमारा दिमाग पुराने नियमों को पीछे छोड़कर, बदलती हुई परिस्थितियों के हिसाब से नई प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो पाता है।
लचीलेपन की कमी से होने वाली बीमारियां
यह 'बौद्धिक लचीलापन' हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी कमी से कई तरह के विकार उत्पन्न हो सकते हैं। जब मस्तिष्क में संज्ञानात्मक लचीलापन कम होने लगता है, तो इंसान को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिनमें शामिल हैं:
- ध्यान-अभाव अतिसक्रियता विकार (ADHD)
- डिप्रेशन
- सिजोफ्रेनिया
- अल्जाइमर
शोधकर्ताओं ने ढूंढा दिमाग का 'स्विच'
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे 'न्यूरल सर्किट' का पता लगाया है जो दिमाग को हमारे व्यवहारिक नियमों को बदलने में सीधी मदद करता है।
इस अध्ययन से यह साफ हुआ है कि मस्तिष्क के स्टेम में एक बेहद छोटी सी संरचना पाई जाती है, जिसे 'लोकस कोरुलियस' कहा जाता है। यही वह खास हिस्सा है जो हमारे दिमाग को अलग-अलग व्यवहारिक नियमों के बीच स्विच करने और हमारी सोच में लचीलापन बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी निभाता है।
'लोकस कोरुलियस' काम कैसे करता है?
इस अहम खोज को समझाते हुए एसोसिएट प्रोफेसर होंगडियन यांग ने बताया कि हमारे मस्तिष्क में 'लोकस कोरुलियस' एक प्रमुख नियामक की तरह काम करता है। आसान शब्दों में कहें तो, यह हमारे दिमाग का वह मैनेजर है जो हमें अलग-अलग व्यवहारिक अवस्थाओं और कामों के बीच आसानी से बदलाव करने में मदद करता है, ताकि हम बिना अटके अपने नए काम पर फोकस कर सकें।