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    दहेज से शुरू होने वाले पति-पत्नी के रिश्ते का अंत कैसा होता है? साइकोलॉजिस्ट ने बताई कड़वी सच्चाई

    Updated: Tue, 26 May 2026 12:23 PM (IST)

    दहेज का असर पति-पत्नी के रिश्ते पर भी पड़ता है। इसके कारण रिश्ते में असमानता और अविश्वास जड़ें जमा लेते हैं। ...और पढ़ें

    दहेज खत्म कर देता है पति-पत्नी के बीच प्यार और विश्वास (AI Generated Image)

    दहेज खत्म कर देता है पति-पत्नी के बीच प्यार और विश्वास (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या प्यार और विश्वास की बुनियाद पर टिकी शादी में दहेज के लिए कोई जगह हो सकती है? अगर कोई रिश्ता शुरुआत से ही लेन-देन का सौदा बन जाए, तो क्या कभी उस रिश्ते में समानता और प्यार की भावना पनप सकती है? 

    दहेज सिर्फ एक सामाजिक बुराई नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर पति-पत्नी के रिश्ते को भी प्रभावित करता है। यह एक दीमक की तरह है, जो शादी के शुरुआत से ही रिश्ते को खोखला करने लग जाता है। आइए जानें सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. मोनिका शर्मा से कि दहेज का यह लालच किस तरह पति-पत्नी के रिश्ते को बर्बाद कर देता है। 

    आत्मसम्मान को ठेस 

    दहेज की मांग सबसे पहले एक महिला के आत्मसम्मान और गरिमा को गहरी चोट पहुंचाती है। जब किसी महिला की अहमियत को उसकी शिक्षा या स्वभाव के बजाय दहेज या उपहारों से उसकी कीमत आंकी जाती है, तो सबसे पहला वार उसके आत्मसम्मान पर होता है। माता-पिता पर दहेज के बोझ को देखकर महिलाएं खुद को बोझ समझने लगती हैं। 

    शादी में असमानता का भाव

    शादी में पति-पत्नी के बीच समानता का भाव होना जरूरी है, लेकिन दहेज के कारण दोनों में समानता का भाव खत्म हो जाता है। इसके कारण पत्नी कभी भी वैवाहिक जीवन में बराबरी का अधिकार महसूस नहीं कर पाती, जिससे रिश्ते की नींव कमजोर हो जाती है। 

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    Dowry Effect on Husband and Wife (1)

    (AI Generated Image)

    विश्वास की कमी

    दहेज को लेकर होने वाली खींचतान पति-पत्नी के बीच एक गहरी खाई पैदा कर देती है। लगाकार मिलने वाले ताने और कमियों को गिनाए जाने से पत्नी के अंदर तनाव, एंग्जायटी और अकेलेपन की भावना घर कर जाती है। ऐसे माहौल में सबसे बड़ा नुकसान विश्वास का होता है। 

    पत्नी अपने उस जीवनसाथी पर भरोसा नहीं कर पाती जो उसके साथ खड़े होने के बजाय अपने परिवार की लालची मांगों को मुंह बंद करके देखता रहता है या खुद उनका हिस्सा बन जाता है। इससे शादी में सुरक्षा और विश्वास की भावना कभी पनप नहीं पाती।

    प्यार और रोमांस का दम टूटना

    जिस रिश्ते की शुरुआत एक-दूसरे को समझने और संवारने की चाहत से होनी चाहिए थी, वह दहेज के कारण एक व्यावसायिक लेन-देन में बदल जाती है। जब हर रोज घर की हवाओं में पैसों, सामानों और उम्मीदों के पूरा न होने की कड़वाहट घुली हो, तो वहां प्रेम, आपसी सम्मान और रोमांस के लिए कोई जगह नहीं बचती। 

    छोटे-छोटे खुशी के पल, तारीफें और साथ बिताया गया अच्छा समय धीरे-धीरे तानों और झगड़ों की भेंट चढ़ जाता है। पति का झुकाव पत्नी के लिए कम होने लगता है और पत्नी के मन में पति के लिए सम्मान की जगह नफरत ले लेती है।

    शारीरिक संबंधों पर असर

    मानसिक तनाव और लगातार हो रहे अपमान का सीधा असर पति-पत्नी के शारीरिक संबंधों पर पड़ता है। जब कोई महिला खुद को भावनात्मक रूप से असुरक्षित, अपमानित या सिर्फ एक सौदा महसूस करती है, तो वह फिजिकल इंटिमेसी से पूरी तरह दूर होने लगती है। 

    डर और डिप्रेशन के कारण इंटिमेसी में उसकी रुचि खत्म हो जाती है। वहीं दूसरी ओर, पति भी पारिवारिक दबाव या चिढ़ के कारण या तो पूरी तरह उदासीन हो जाता है या फिर आक्रामक रवैया अपना लेता है। यह दूरी उनके बीच के फासले को और ज्यादा बढ़ा देती है।

    घरेलू हिंसा का कारण

    जब दहेज की मांगें पूरी नहीं होतीं, तो बात सिर्फ मानसिक प्रताड़ना तक सीमित नहीं रहती। यह शारीरिक, आर्थिक और गंभीर घरेलू हिंसा का रूप ले लेती है, जो कई बार दहेज हत्या या आत्महत्या जैसी घटनाओं पर जाकर खत्म होती है।