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    सतुआन 2026: अक्षय पुण्य की प्राप्ति के लिए सतुआन के दिन जरूर करें ये विशेष दान

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 08:00 PM (IST)

    सतुआन पर्व 14 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन खरमास समाप्त होता है और मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और इस दिन सत्तू खाने व ...और पढ़ें

    सतुआन का महत्व (Image Source: AI-Generated)

    सतुआन का महत्व (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं (मेष संक्रांति), तब यह त्योहार मनाया जाता है। मुख्य रूप से यह पर्व भीषण गर्मी के मौसम के स्वागत और नई फसल के आगमन का प्रतीक है। सतुआन के दिन से ही लोग अपने खान-पान में बदलाव करते हैं और सत्तू खाना शुरू करते हैं।

    सतुआ संक्रांति के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व का वर्णन 'निर्णयसिंधु' और 'धर्मसिंधु' जैसे शास्त्रों में मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार, जब सूर्य मेष राशि में आता है, तो वह समय 'महापुण्यकाल' होता है।

    सतुआन पर्व 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

    इस साल सतुआन का यह पावन पर्व 14 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को मनाया जा रहा है।

    पुण्य काल (शुभ समय): सुबह 05:57 बजे से लेकर दोपहर 01:55 बजे तक रहेगा

    मेष संक्रांति का सटीक समय: सुबह 09:39 बजे

    इस पुण्य काल में स्नान, दान और पूजा-पाठ करना सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है।

    सतुआन की पूजा विधि

    Satuan-daan

    (Image Source: AI-Generated)

    इस त्योहार की परंपराएं सीधे हमारी सेहत और प्रकृति से जुड़ी हैं

    सूर्य देव की उपासना: सतुआन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है और तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल (अर्घ्य) अर्पित किया जाता है।

    घड़े का जल: इस पर्व से ठीक एक दिन पहले एक मिट्टी के नए घड़े में पानी भरकर रखा जाता है। अगले दिन सुबह नहाने के बाद घर का कोई सदस्य उस पवित्र जल का छिड़काव पूरे घर में करता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और घर शुद्ध होता है।

    खानपान की रीत: कई इलाकों में इस दिन बासी खाना खाने की भी एक पुरानी परंपरा है। इसके साथ ही, प्रसाद के रूप में सत्तू, गुड़ और आम का टिकोरा (कच्चा आम) खाया जाता है।

    क्यों इतना खास है सतुआन?

    सतुआन के दिन ही 'खरमास' (मलमास) खत्म हो जाता है। इसका मतलब है कि शादियों, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाती है और शहनाइयां फिर से बजने लगती हैं।

    यह त्योहार हमें सिखाता है कि बदलते मौसम में शरीर का ख्याल कैसे रखें। इस दिन से खाई जाने वाली ठंडी तासीर वाली चीजें- जैसे सत्तू, कच्चा आम, मूली और गुड़, हमारे शरीर को लू और गर्मी से बचाती हैं और पेट को ठंडक पहुंचाती हैं।

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    सतुआन पर किन चीजों का करें दान?

    सतुआन के दिन दान करने का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है।

    • बाजार से एक नया मिट्टी का घड़ा लाएं, उसमें शुद्ध जल भरें, उसके गले पर लाल कलावा (मौली) बांधें और विधिवत पूजा करने के बाद किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को इसका दान कर दें। यह एक महापुण्य माना जाता है।
    • भीषण गर्मी को देखते हुए इस दिन सत्तू, गुड़, हाथ से झलने वाला पंखा, छाता और चप्पल/जूते का दान करना भी बहुत ही शुभ और कल्याणकारी होता है

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।