पापियों के लिए नर्क से कम नहीं है वैतरणी नदी, पढ़ें गरुड़ पुराण में छिपा रहस्य
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक जाते समय वैतरणी नदी पार करनी पड़ती है। पापी आत्माएं इसे कष्ट से पार करती हैं, जबकि धर्मात्मा गाय द ...और पढ़ें
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वैतरणी नदी से कैसे बचती है आत्मा? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
वैतरणी नदी यमलोक के रास्ते में आती है, खून-मांस से भरी
पापी आत्माएं तैरकर पार करती हैं, धर्मात्मा को नाव मिलती है
गाय दान से आत्मा को वैतरणी पार करने में मदद मिलती है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में कई महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ हैं, जिनमें गरुड़ पुराण ग्रंथ भी शामिल है। इस धार्मिक ग्रंथ में मृत्यु और उसके बाद के सफर के बारे में बताया गया है। इस सफर में वैतरणी नदी आती है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि यह एक बेहद भयानक नदी है और यमलोक तक पहुंचने के लिए आत्मा को वैतरणी नदी पार करनी पड़ती है, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं गरुड़ पुराण में वर्णित वैतरणी नदी के रहस्य के बारे में।
क्या है वैतरणी नदी
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद जब आत्मा यमलोक की तरफ जाती है, तो रास्ते में एक नदी पड़ती है। उसका नाम वैतरणी नदी है। यह नदी खून, मांस और हड्डियों से भरी हुई है। नदी में पक्षी और नुकीले दांतों वाली मछलियां निवास करती हैं।
जिन लोगों ने जीवन के दौरान पाप किए होते हैं या फिर धर्म के विरुद्ध काम किया होता है, तो उन लोगों को वैतरणी नदी को तैरकर पार करना पड़ता है। इस दौरान आत्मा को उन्हें नोचते और काटते हैं।
जिन लगों ने जीवन में कोई पाप नहीं किया होता है। दान और धर्म के काम किए होते हैं, तो उन लोगों को वैतरणी नदी को पार करने के लिए एक नाव मिल जाती है और बिना किसी कष्ट के वो आत्मा इस नदी को पार कर लेती है।
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वैतरणी का महत्व
गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर मृत्यु के दौरान या मृत्यु के बाद गाय का दान किया जाता है, तो उस आत्मा को वैतरणी नदी को पार करते समय गौ माता की मदद प्राप्त होती है। इस दौरान आत्मा गाय की पूंछ को पकड़कर वैतरणी नदी को आसानी से पार कर लेती है। इसलिए गाय का दान करने का अधिक महत्व है।
वैतरणी नदी के बाद आत्मा कहां जाती है?
आत्मा वैतरणी नदी को पार करने के बाद यमराज के पास पहुँचती है। यहां पर हर एक आत्मा को आना पड़ता है। यम के सामने आत्मा को जीवन के दौरान किए गए कर्मों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद आत्मा के कर्मों के अनुसार यमराज अपना न्याय सुनाते हैं।
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गरुड़ पुराण में मिलता है वर्णन
मृत्यु के बाद वैतरणी नदी को पार करने का विस्तार से वर्णन गरुड़ पुराण के प्रेत खण्ड में मिलता है।
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