सिर्फ पुरुष ही नहीं, महिलाएं भी थीं 'ऋषि', इन 5 'नारी ऋषियों' के बारे में नहीं जानते होंगे आप
ऋषि शब्द सुनते ही आपके मन में एक पुरुष की छवि उभरती होगी, लेकिन क्या आपको पता है कि वैदिक काल में ऋषि शब्द पुरुष और स्त्री दोनों के लिए इस्तेमाल किया ...और पढ़ें

महिला ऋषि जिन्होंने दुनिया को दिया आध्यात्मिक ज्ञान (Picture Credit: Freepik) (AI Image)
HighLights
वैदिक काल में महिलाएं भी थीं महान 'ऋषि'
गार्गी, मैत्रेयी जैसी ऋषिकाओं ने दिया आध्यात्मिक ज्ञान
वेदों के दार्शनिक रहस्यों को किया उजागर और साझा
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक काल में शिक्षा और ज्ञान पर सिर्फ पुरुषों का एकाधिकार नहीं था, बल्कि महान ऋषिकाओं ने भी वेदों के दार्शनिक रहस्यों को उजागर कर दुनिया को आध्यात्मिक और वैज्ञानिक ज्ञान दिया। ऋग्वेद में लगभग 27 विदुषी महिलाओं (ऋषिकाओं) का उल्लेख है, जिन्होंने मंत्रों की रचना की और सर्वोच्च ज्ञान (ब्रह्मविद्या) को साझा किया।
चलिए जानते हैं कुछ ऐसी ही महान ऋषिकाओं के बारे में, जो न केवल मंत्रों की दृष्टा (रचयिता) थीं, बल्कि वे ब्रह्मविद्या में निपुण थीं और समाज में उन्हें सर्वोच्च सम्मान प्राप्त था।
1. गार्गी वाचकनावी - गार्गी, वैदिक काल की एक दार्शनिक और बाल ब्रह्मचारिणी ऋषि थीं। ऋषि वाचकनु की पुत्री होने के कारण 'वाचकनवी' और गर्ग गोत्र में जन्म लेने के कारण 'गार्गी' कहलाई। यह अपनी अपार बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं। इन्होंने राजा जनक के दरबार में महर्षि याज्ञवल्क्य को शास्त्रार्थ (बौद्धिक बहस) में चुनौती दी थी।
2. मैत्रेयी - विदुषी स्त्रियों में मैत्रेयी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। यह ऋषि याज्ञवल्क्य की पत्नी थीं, जो एक दार्शनिक के रूप में जानी जाती हैं। जब एक बार ऋषि याज्ञवल्क्य ने दोनों पत्नियों के सामने अपनी संपत्ति को बराबर हिस्से में बांटने का प्रस्ताव रखा, तो मैत्रेयी ने सांसारिक संपत्ति के बजाय आत्मज्ञान को चुना। वह अपने पति की विचार-संपदा की स्वामिनी बन गई।

(Picture Credit- AI Generated)
3. लोपामुद्रा - ऋषिका लोपामुद्रा, ऋषि अगस्त्य की पत्नी थीं, जिन्होंने ऋग्वेद के कई सूक्तों की रचना की। लोपामुद्रा महर्षि दुर्वासा की शिष्या, श्रीविद्या से दीक्षित होकर अपने पति यानी ऋषि अगस्त्य की दीक्षा गुरु बनी। उन्होंने महान ऋषिकाओं ने वेदों के दार्शनिक रहस्यों को उजागर कर दुनिया को आध्यात्मिक और वैज्ञानिक ज्ञान दिया।
खबरें और भी
4. अपला - अपला भी वैदिक काल की एक विदुषी महिला हैं, जो अत्रि मुनि और अनुसुइया की पुत्री थीं। वह ऋग्वेद के आठवें मंडल (सूक्त 8.91) की ऋचाओं की रचयिता हैं। उन्हें वेदों की ऋचाएं कंठस्थ थीं और वह एक वेदज्ञ (वेदों की ज्ञाता) थीं। उन्होंने इंद्र की तपस्या कर न केवल रोगमुक्त होकर सौंदर्य पाया, बल्कि ब्रह्मज्ञान की भी प्राप्ति की।
5. विश्ववारा - विश्ववारा वैदिक काल की एक प्रमुख विदुषियों में से एक रही हैं, जिन्हें ऋषि की उपाधी प्राप्त है। यह ब्रह्मवादिनी थीं, जिनका जन्म अत्रि गोत्र में हुआ था। उन्होंने ऋग्वेद के 5वें मण्डल (सूक्त 28) के मन्त्रों का दर्शन किया, जिनमें अग्निदेव की स्तुति और अतिथि सत्कार के नियम बताए गए हैं।
यह भी पढ़ें - इस विशेष शर्त के कारण हुआ मेघनाद का वध, जानें लक्ष्मण जी की जीत की पौराणिक कथा
यह भी पढ़ें - जब बाली का वध बना द्वापर युग में श्रीकृष्ण की मृत्यु का कारण, कम ही लोगों ने सुनी होगी यह पौराणिक कथा
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।