कैलाश पर्वत उठाने वाला रावण क्यों नहीं उठा पाया धनुष? पढ़ें सीता स्वयंवर की अनसुनी कथा
सीता स्वयंवर में रावण शिव धनुष (पिनाक) नहीं उठा पाया, जबकि भगवान श्रीराम ने उसे तोड़ दिया। पौराणिक कथा के अनुसार, धनुष उठाने के लिए विनम्रता, प्रेम और ...और पढ़ें

रावण को अपनी शक्तियों पर था घमंड

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण में सीता स्वयंवर को बेहद महत्वपूर्ण प्रसंग माना जाता है। सीता स्वयंवर का आयोजन राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता जी के लिए किया था। स्वयंवर में राजा जनक ने एक कठिन शर्त रखी थी कि जो भगवान शिव के दिव्य धनुष (पिनाक धनुष) पर प्रत्यंचा (डोरी) चढ़ाएगा, तो उसी के साथ मां सीता का विवाह तय कर दिया जाएगा।
इस आयोजन में कई शक्तिशाली राजा शामिल हुए, जिनमें लंकापति रावण भी था। स्वयंवर में कोई भी राजा धनुष को हिला नहीं सका। जब रावण अपार शक्ति के साथ धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने पहुंचा, तो वह भी पिनाक धनुष को उठा नहीं पाया।
अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि इतना शक्तिशाली होने के बाद भी रावण धनुष को क्यों नहीं उठा पाया। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं सीता स्वयंवर के इस खास प्रसंग के बारे में।
रावण क्यो नहीं उठा पाया धनुष?
पौराणिक कथा के अनुसार, रावण को अपनी शक्तियों पर अधिक अहंकार था। सभा में जब रावण पहुंचा, तो उसमें अधिक अहंकार था। वहीं, पिनाक कोई साधारण अस्त्र नहीं था, बल्कि उसमें देवों के देव महादेव की शक्तियां थीं। इस पिनाक धनुष को उठाने के लिए दिल में विनम्रता, प्रेम, और शुद्धता की जरूरत थी। जो रावण में नहीं थी।
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इसी वजह से रावण धनुष को नहीं उठा पाया। इसके बाद भगवान श्रीराम धनुष के पास पहुंचें। इस दौरान उनमें अहंकार नहीं था। उन्होंने धनुष को उठाने से पहले गुरु विश्वामित्र को प्रणाम किया और महादेव का ध्यान किया। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने धनुष को उठाया और फिर प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया।
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पौराणिक कथा के अनुसार, महादेव ने धनुष को परशुराम को दिया था। वह भगवान शिव के परम थे। इसके बाद उन्होंने इस धनुष को राजा जनक को धरोहर के रूप में दिया था। राजा जनक के दरबार में धनुष की रोजाना विशेष पूजा-अर्चना होती थी।
शास्त्रों में मिलता है वर्णन
सीता स्वयंवर का वर्णन रामायण के बाल कांड में किया गया है। पिनाक का अर्थ है धनुष। यह पिनाक धनुष भगवान शिव को बेहद प्रिय था। इसी वजह से जो इसे धारण करता है, तो उसे 'पिनाकी' या 'पिनाकपाणि' कहा जाता है
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