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    वास्‍तु शास्‍त्र: किस दिशा में बैठकर शिवलिंग की पूजा करने से कया मिलेगा फल ?

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 08:30 PM (IST)

    वास्तु शास्त्र के अनुसार शिवलिंग की पूजा किस दिशा में बैठकर करनी चाहिए? जानें दक्षिण, उत्तर, पूर्व और पश्चिम दिशा से जुड़े धार्मिक नियम। ...और पढ़ें

    शिवलिंग पूजा की सही दिशा । (Picture Credit- AI Generated)

    शिवलिंग पूजा की सही दिशा । (Picture Credit- AI Generated)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन के महीने में हर कोई भगवान शिव की पूजा करने के लिए मंदिर जाता है और शिवलिंग पर जल चढ़ाता है। लेकिन जल्‍दबाजी में हम अक्‍सर दिशा का ध्‍यान रखना भूल जाते हैं। अमूमन लोगों पता भी नहीं होगा कि शिवलिंग पूजा और जल चढ़ाने के कुछ विशेष वास्‍तु नियम हैं।

    यदि आप सही दिशा में बैठकर शिवलिंग की पूजा करते हैं, तो उससे आपको लाभ मिलता है और आपके भाग्‍य खुल जाते हैं। जबकि गलत दिशा में बैठकर पूजा करने से कोई फल प्राप्‍त नहीं होता है, उल्‍टा भक्‍त का नुकसान ही हो जाता है। तो चलिए जानते हैं शिवलिंग की पूजा करते समय किस दिशा में बैठना चाहिए

    शिवलिंग की पूजा करने के लिए सबसे अच्‍छी दिशा

    वास्तु शास्‍त्र के अनुसार, दक्षिण दिशा में बैठकर उत्तर की ओर मुख करके भगवान शिव की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा में बैठकर जलाभिषेक, मंत्र जाप और पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

    पश्चिम दिशा में बैठकर पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पश्चिम दिशा भगवान शिव की पीठ होती है। इसलिए इस दिशा में बैठकर शिवलिंग की पूजा या जलाभिषेक करना उचित नहीं माना जाता। यदि आप इस दिशा में बैठकर शिवलिंग पूजा करते हैं, तो इससे आपके हाथ केवल दरिद्रता ही लगती है।

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    पूर्व दिशा का क्या महत्व है?

    कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्व दिशा की ओर बैठने या मुख करने से पूजा के दौरान भगवान शिव के दर्शन में बाधा आती है। पूजा के वक्‍त किसी भी प्रकार की बाधा पूजा अपूर्ण बनाती है। इसलिए पूर्व दिशा में बैठकर भी भगवान शिव की पूजा नहीं करनी चाहिए।

    उत्तर दिशा में बैठकर भी न करें पूजा

    धार्मिक मान्यता के अनुसार शिवलिंग के उत्तर भाग को माता पार्वती का स्थान माना जाता है। इसी वजह से इस दिशा में बैठकर पूजा करने से बचने की सलाह दी जाती है। इस दिशा से भगवान शिव के स्‍थान पर माता पार्वती को जल अर्पित करना चाहिए। इस दिशा से शिवलिंग की पूजा करने का भी कोई फल प्राप्‍त नहीं होता है।

    अत: भगवान शिव की पूजा में दिशा का महत्व धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। दक्षिण दिशा में बैठकर उत्तर की ओर मुख करके पूजा करना ही शुभ माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।