12 लाख की आबादी वाले खोड़ा में अपराध, अवैध निर्माण और कट्टरता की तिहरी चुनौती; गलियां बनीं अपराधियों की ढाल
गाजियाबाद का खोड़ा क्षेत्र अपराध, अवैध निर्माण और मजहबी कट्टरता की तिहरी चुनौती से जूझ रहा है। 12 लाख से अधिक आबादी वाली यह कॉलोनी अपराधियों के लिए सु ...और पढ़ें

खोड़ा का ओवर व्यू। जागरण
आशुतोष गुप्ता, साहिबाबाद। एशिया की सबसे बड़ी अवैध काॅलोनियों में शुमार खोड़ा मिश्रित आबादी व अपराधियों की शरणस्थली के लिहाज से संवेदनशील हो चुका है। तीन जिलों की सीमा और दिल्ली से सटे होने व भूलभुलैया गलियों के कारण खोड़ा अपराधियों के लिए महफूज पनाहगार है। मिली-जुली आबादी होने के कारण यहां पिछले कुछ समय में जिहादी व मजहबी कट्टतरता विचारधारा को बढ़ावा मिला है। पिछली घटनाओं को देखते हुए यदि कहा जाए कि खोड़ा में जिहादी मानसिकता की पौध तेजी से तैयार हो रही है तो गलत नहीं होगा।
मतांतरण से लेकर हर तरह के अपराध का गढ़
खोड़ा में पिछले कुछ समय में इस तरह की गतिविधियां तेज हुई हैं। मतांतरण समेत खूनी खेल से जिले की धरती लाल हुई है। बावजूद इसके पुलिस व प्रशासनिक अमला खोड़ा की इस संवेदनशीलता को देखते हुए गंभीर नहीं हुआ और यहां पर प्रभावी तरीके से सत्यापन अभियान नहीं चलाए गए।
एक तरफ 12 लाख से अधिक की आबादी वाला खोड़ा बड़े जरूरतमंद वर्ग के लिए एनसीआर में आवास का आसरा बन रहा है। यहां लगातार बढ़ती अपराध, जमीन माफिया, हथियार माफिया का गढ़ भी बड़ी चुनौती बन रहा है।
बढ़ती आबादी और बढ़ता अवैध निर्माण यहां भविष्य के लिए बड़ी चिंता का विषय है। इस मुद्दे पर तीन दिवसीय सीरीज शुरू कर रहे हैं। जिसकी पहली कड़ी आज दी जा रही है।
लापता पते बने बड़े सवाल
खोड़ा काॅलोनी को बसे हुए करीब 43 हो चुके हैं। यहां धीरे-धीरे भूमाफिया बढ़े और अवैध निर्माण ने जोर पकड़ा तो आबादी 12 लाख के पार पहुंच गई। बिहार, बंगाल, पूर्वांचल, झारखंड समेत अन्य राज्यों की आबादी बड़ी संख्या में खोड़ा में वास करती है। इसके साथ ही खोड़ा में 42 साल के भीतर मकान बिना पते के लापता रहे। इस कारण भी खोड़ा अपराधियों की शरणस्थली के लिए आसान टारगेट रहा।
सघन सत्यापन अभियान चलाने की है आवश्यकता
पिछले एक साल से ही मकानों को उनकी पहचान मिलनी शुरू हुई। खोड़ा में रहने वाले अपराधी पूरे एनसीआर में आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं और आसानी से यहां से आकर छिप जाते हैं। बिना वेरिफिकेशन आसानी से सस्ते मकान मिलने के कारण अपराधियों के लिए यहां रहना और समय पर छोड़कर भाग जाना आसान है। पुलिस के सेवानिवृत अधिकारियों का कहना है कि यदि खोड़ा में समय-समय पर सत्यापन अभियान चलाए जाएं तो यहां अपराध व अपराधियों पर काबू हद तक काबू पाया जा सकता है।
खबरें और भी
पूर्व में कट्टरता के कई मामले आ चुके हैं सामने
- सूर्या चौहान पर भी बकरीद के दिन कट्टरता के तहत चाकू से हमला किया गया। इस हमले में मुख्य आरोपित असद उसका पिता समेत दोस्त शामिल थे। पिता नवाब ने ही असद को चाकू देकर सूर्या पर हमला करने के लिए कहा था। पुलिस ने पिता समेत तीन आरोपित गिरफ्तार हुए थे जबकि असद पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
- फरवरी 2026 में मजहबी कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाने वाले यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर जानलेवा हमला किया गया था। यह हमला खोड़ा के रहने वाले सगे भाइयों जीशान व गुलफाम ने किया था। दोनों को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान मार गिराया था। यह हमला दोनों ने पाकिस्तान में बैठे हुए आका के कहने पर किया था। हालांकि बाद में सलीम वास्तिक पूर्व में दिल्ली के एक अपहरण के बाद हत्या मामले में दोषी पाय गया और वह नाम बदलकर यहां रह रहा था। दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।
- जुलाई 2023 में खोड़ा में बड़े स्तर पर चल रहे मतांतरण का पुलिस ने पर्दाफाश किया था। पुलिस ने मोहम्मद राहिल उर्फ राहुल अग्रवाल, अब्दुल्ला अहमद उर्फ सौरभ खुराना व मोहम्मद मुशीर समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया था। आरोपित फरीदाबाद के एक पैरा मेडिकल सेंटर से जुड़े हुए थे और युवतियों से दोस्ती कर उनका मतांतरण कराते थे। इनसे पूछताछ के आधार पर प्रदेश भर से पुलिस ने बड़ी संख्या में अारोपितों को गिरफ्तार किया था।
- पिछले साल यूट्यूबर मनी मराज ने अपनी सहकर्मी से अपना नाम व धर्म छिपाकर दोस्ती की और शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। दबाव बनाने पर आरोपित ने शादी कर ली लेकिन मतांतरण का दबाव बनाया। आरोप है कि आरोपित ने उन्हें गोमांस खिलाने का प्रयास भी किया। पुलिस ने मामले में आरोपित को गिरफ्तार किया था।
मुख्यमंत्री के कड़े तेवर के बाद याद आया अभियान
सूर्या चौहान की हत्याकांड मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया और घटना पर तेवर कड़े दिखाए। इसके बाद पुलिस प्रशासन को खोड़ा में अपराधियों के सत्यापन अभियान की याद आई और खोड़ा में अवैध रूप से संचालित मदरसे दिखाई दिए। ऐसा अभी नहीं जब कोई बड़ी घटना होती है तो पुलिस सक्रिय होती है और बाद में फिर प्रशासन लंबी नींद सो जाता है।
सस्ते शूटर और छोटे गैंग के लिए जाना जाता है खोड़ा
खोड़ा को छोटे गिरोहों व सस्ते शूटर के लिए जाना जाता है। खोड़ा में अपराधी सस्ते मकानों में रह कर आसानी से छुप जाता है और बाहर जाकर अपराध करता है। पूर्व में बड़े गैंग्सटर सुंदर भाटी, अनिल दुजाना समेत अन्य के गुर्गें खोड़ा को पनाहगाह मानते थे।
"खोड़ा और लोनी क्षेत्र में सत्यापन अभियान चल रहा है। अभियान के तहत अपराधियों का सत्यापन किया जाएगा। खोड़ा में अवैध निर्माण की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।"
-जे. रविंद्र गौड, पुलिस कमिश्नर
"परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया गया था। जिसे पूरा करते हुए मंगलवार को स्वजन को नियुक्ति पत्र दिया गया है। परिवार की सुरक्षा को लेकर निर्णय लिया जा रहा है।"
-रविंद्र कुमार मांदड़, जिलाधिकारी
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