देश में सोना आयात घटाने की चुनौती का सामना बुलियन बैंक से, महिलाओं को मुनाफा, संभलेगा सराफा बाजार
देश में बुलियन बैंक की स्थापना से सोने का आयात कम होगा और घरों व मंदिरों में रखे 30 हजार टन सोने को चलन में लाया जा सकेगा। इससे महिलाएं अपने सोने पर 2 ...और पढ़ें

HighLights
बुलियन बैंक से सोना आयात घटाने में मिलेगी मदद।
घरों और मंदिरों में सुरक्षित है 30 हजार टन सोना
सोने पर सरकार देती है ढाई प्रतिशत का ब्याज
जागरण संवाददाता, कानपुर। सोना आयात घटाने की चुनौती का सामना देश का बुलियन बैंक कर सकता है। इससे जहां मंदिरों और घरों में मौजूद हजारों टन सोना चलन में आएगा वहीं बुलियन बैंक को सोना देकर मंदिर ट्रस्ट और 'स्त्री धन' यानी जेवर देकर घर की महिलाएं ढाई प्रतिशत तक वार्षिक ब्याज कमा सकेंगी। इससे सराफा कारोबारियों को भी सोने की कमी नहीं होगी और देश को सोने के आयात पर डालर भी नहीं चुकाना होगा।
सराफा कारोबारी अब बुलियन बैंक स्थापित करने पर जोर दे रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार अगर कोई महिला अपने विवाह के उपरांत बैंकों में सोना जमा कर देती है और उसे अगले 20 साल तक सोने की दोबारा जरूरत नहीं होती है तो वह अपने सौ ग्राम सोने से 50 ग्राम अतिरिक्त सोना जुटा लेगी, क्योंकि सरकार हर साल 100 ग्राम सोने पर ढाई ग्राम सोना दे रही है।
इसी तरह मंदिरों और धर्मार्थ ट्रस्ट को भी मोटी कमाई हो जाएगी। आल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (एआइजेजीएफ) ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर बुलियन बैंक बनाने की मांग की है। इससे एक साल से ज्यादा समय तक भारत को सोना आयात करने की जरूरत नहीं रहेगी। घरों और मंदिरों में करीब 30 हजार टन सोना सुरक्षित है।
सराफा बाजार पर आश्रित 50 हजार परिवार
उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन किया और कहा कि वैश्विक कारणों से अर्थव्यवस्था को मिल रही चुनौतियों से निपटने के लिए सभी देशवासी साथ हैं लेकिन सराफा बाजार और कारीगरों, कर्मचारियों को बचाने की जिम्मेदारी भी सरकार की है। अकेले कानपुर में 50 हजार से ज्यादा परिवारों की रोजी-रोटी सराफा बाजार पर आश्रित है। सात हजार से ज्यादा सराफा कारीगर हैं जो जेवर की बनने की प्रक्रिया से जुड़े हैं।
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उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा बाजार
सराफा बाजार पिछले पांच से छह महीनों से बड़े उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। सहालग में 125 करोड़ रुपये का सोना-चांदी बिकता रहा है। इस साल महंगाई बढ़ने से बाजार में डिमांड कम है। लगभग 45 करोड़ का कारोबार बचा है। अगर अपील का असर होता है तो यह बाजार आधा से भी कम हो जाएगा। तब ज्वैलर्स को अपने शोरूम के संचालन और कारोबारी गतिविधियों के लिए भी जरूरी आय नहीं मिल पाएगी। छोटे दुकानदार, पारंपरिक सुनार, कारीगर, रिफाइनर, हालमार्किंग सेंटर और दिहाड़ी मजदूर को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को आकर्षक बनाने के साथ ही बुलियन बैंक से मिलने वाले ब्याज को टैक्स मुक्त कर सरकार लोगों को घरों में रखा सोना बाहर लाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। सरकार अपने पास रखे सोने को ब्याज पर देकर सराफा बाजार को मजबूत कर सकती है।
-पंकज अरोरा, अध्यक्ष आल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन
विलासितापूर्ण वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया जाए तो डालर के खर्च को नियंत्रित किया जा सकता है। घरों में मौजूद सोने का दस प्रतिशत भी बाहर आ जाए तो कई साल तक सोना आयात नहीं करना पड़ेगा।
- रामकिशोर मिश्रा, मंत्री उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन
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