कानपुर देहात में 1068 हेक्टेयर भूमि घोटाला, थर्मल प्लांट लगा नहीं बैंकों से हड़पे 400 करोड़; पूर्व ADM समेत कई पर FIR
कानपुर देहात में 1068 हेक्टेयर जमीन पर थर्मल प्लांट लगाने के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। कंपनियों ने अफसरों की मिलीभगत से जमीन बैंक में गिरवी रखक ...और पढ़ें

कानपुर देहात स्थित वह जमीन, जहां स्थापित किया जाना था पावर प्लांट। जागरण
HighLights
कानपुर देहात में पावर प्लांट लगाया नहीं, 400 करोड़ का ऋण लेकर हड़पा
नोडल अफसर कानपुर के तत्कालीन एडीएम भूमि-अध्याप्ति, उनके कार्यालय के कर्मियों पर साठगांठ का आरोप
गुरुग्राम की हिमावत और लैंको अनपरा कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी व कई बैंकों के अफसर-कर्मी भी फंसे
जागरण संवाददाता, कानपुर देहात। थर्मल पावर प्लांट लगाया नहीं व उसके नाम पर अधिग्रहीत 1068 हेक्टयेर जमीन पर लगभग 400 करोड़ रुपये का ऋण लेकर हड़प लिया व स्वयं को दिवालिया घोषित कर दिया। इसके बाद बैंकों ने ऋण वसूलने के लिए जमीन नीलाम कर दी। वर्ष 2011 के इस मामले में सरकार के साथ हुई धोखाधड़ी में जांच के बाद आरोपित हरियाणा के गुरुग्राम की कंपनी हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड व लैंको अनपरा पावर लिमिटेड के अधिकारी एनएन मूर्ति राजू एवं कर्मचारियों, तत्कालीन एडीएम भूमि-अध्याप्ति कानपुर ओके सिंह, उनके कार्यालय के कर्मियों, गुरुग्राम स्थित आइडीबीआइ, केनरा व पंजाब नेशनल बैंक शाखा के अफसरों व कर्मियों पर मंगलवार को मुकदमा दर्ज कराया गया है।
आरोप है कि अधिकारियों व बैंकों की मिलीभगत से घोटाला हुआ। एएसपी आलोक प्रसाद ने बताया कि सभी आरोपितों के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज बनाना, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है।
चपरघटा व आसपास के गांव में 1320 मेगावाट क्षमता का थर्मल पावर प्लांट बनाया जाना था। इसके लिए हरियाणा के गुरुग्राम के फेस-तीन उद्योग विहार स्थित हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को एक सितंबर,2010 को भोगनीपुर के ग्राम कृपालपुर, चपरघटा, रसूलपुर भुरंडा, अमिलिया, सिहारी, कछगांव व भरतौली की निजी भूमि व ग्राम समाज की भूमि अधिग्रहीत करने के निर्देश जारी किए गए। हिमावत की ही सहयोगी कंपनी लैंको अनपरा पावर प्राइवेट लिमिटेड भी इसमें शामिल थी।
इसके बाद वर्ष 2011 में मामला आगे बढ़ा। नोडल अधिकारी एडीएम भूमि-अध्याप्ति कानपुर ने सार्वजनिक प्रकाशन के बाद भूमि अधिग्रहीत कराई। तत्कालीन एडीएम व दोनों कंपनियों के बीच करार में जमीन 30 वर्षों की लीज पर दी गई, जिसमें एक लाख रुपये किराया दिया जाना था। उस समय तीन वर्ष से अधिक का समय बीतने के बाद भी पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। वर्ष 2011 से अब तक 14 वर्ष में जमीन का किराया नहीं दिया गया।
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जांच में पता चला कि दोनों कंपनियों ने षड्यंत्रपूर्वक राज्य सरकार को लगभग 400 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाई। कंपनियों ने कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से बैंकों से जमीन को बंधक रख ऋण लिया। शासन के निर्देशानुसार, कंपनियों को भूमि को बंधक अथवा विक्रय करने का अधिकार प्राप्त नहीं था, यदि ऐसा करना भी था तो सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य था, लेकिन कंपनियों ने कोई अनुमति ली।
भोगनीपुर तहसीलदार प्रिया सिंह ने बताया कि उपरोक्त मामले की छह माह पहले जांच मिली थी व जांच में घोटाले की पुष्टि हुई है। उधर, आरोपित तत्कालीन एडीएम ओके सिंह, कंपनियों व बैंकों के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया पर बात नहीं हो सकी।
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