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    कानपुर में साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश, हलवाई के खाते में मिले 3.25 करोड़ रुपये,  8 राज्यों में 10 करोड़ की ठगी

    Updated: Tue, 12 May 2026 11:34 PM (IST)

    कानपुर पुलिस ने साइबर ठगों को म्यूल खाते उपलब्ध कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर एक हलवाई समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन खातों में डिजिटल अरेस्ट ...और पढ़ें

    डिजिटल अरेस्ट के नाम ठगी करने में गिरफ्तार दाएं जगदीश चंद्र गुप्ता और रोहित भसीन। जागरण

    डिजिटल अरेस्ट के नाम ठगी करने में गिरफ्तार दाएं जगदीश चंद्र गुप्ता और रोहित भसीन। जागरण

    HighLights

    1. साइबर ठगों को म्यूल खाते उपलब्ध कराने वाला गिरोह पकड़ा, मिठाई कारीगर के खाते में मिले 3.25 करोड़

    2. आठ राज्यों में लोगों से डिजिटल अरेस्ट कर खातों में मंगवाए 10 करोड़ रुपये, दो आरोपित गिरफ्तार

    3. सीबीआइ अधिकारी बनकर लोगों से करते थे ठगी, एनसीआरबी पोर्टल पर पुलिस को मिली थी शिकायत

    4. नोएडा में आइसीआइसीआइ बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत से आरोपितों ने खुलवाए थे म्यूल खाते

    जागरण संवाददाता, कानपुर। पनकी पुलिस और साइबर सेल ने साइबर ठगों को म्यूल खाते उपलब्ध कराने वाले गिरोह का राजफाश करते हुए हलवाई समेत दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के खातों में आठ राज्यों से करीब 10 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन मिला है। इनमें हलवाई के खाते में 3.25 करोड़ रुपये मिले हैं, जो डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगे गए थे।

    डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और समन्वय पोर्टल पर लंबे समय से आइसीआइसीआइ बैंक के एक संदिग्ध खाते की आठ शिकायतें आई थीं। खाते में 3.25 करोड़ रुपये के लेनदेन की पुष्टि हुई। जांच में सामने आया कि साइबर ठग खुद को सीबीआइ और आयकर अफसर बता लोगों को डिजिटल अरेस्ट करते थे और डराकर रकम वसूलते थे। ठगी की रकम आरोपितों के खातों में ट्रांसफर की जाती थी।

    यहां से किया गिरफ्तार

    पुलिस ने पनकी पड़ाव स्थित बहादुर नगर निवासी हलवाई जगदीश चंद्र गुप्ता को गिरफ्तार किया। जगदीश ने पूछताछ में बताया कि ओमनगर गुमटी नंबर-पांच निवासी रोहित भसीन ने उसके नाम से बालाजी फाउंडेशन नामक फर्जी संस्था बनाकर बैंक खाता खुलवाया था। इसी खाते में साइबर ठगी की रकम जमा कराई जाती थी। जगदीश की निशानदेही पर पुलिस ने रोहित भसीन को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों के पास से कई बैंक खातों की चेकबुक, पासबुक, एटीएम कार्ड और दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

    16 मोबाइल नंबर मिले

    पुलिस को 16 मोबाइल नंबर भी मिले हैं, जिनमें प्रत्येक नंबर पर पांच से अधिक साइबर की शिकायतें दर्ज हैं। डीसीपी ने बताया कि खातों में आंध्र प्रदेश से 44.93 लाख, हरियाणा के सोनीपत से 19.80 लाख, गोवा से 42.60 लाख, गुजरात से 99 लाख, कर्नाटक से 6.54 लाख, पुणे से 31.60 लाख और 20.20 लाख तथा तेलंगाना से 46.70 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। रोहित भसीन नोएडा के सेक्टर अल्फा-वन स्थित आइसीआइसीआइ बैंक के कर्मचारियों से साठगांठ कर म्यूल खाते खुलवाता था।

    खबरें और भी

    गुजरात पुलिस कर चुकी गिरफ्तार

    इसमें शाखा प्रबंधक धीरज सिंह, सहायक प्रबंधक मुकुल वर्मा और धीरज तिवारी की भूमिका सामने आई है। इन तीनों को गुजरात पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। डीसीपी ने बताया कि आरोपित बैंक कर्मचारियों की मदद से खातों के लेनदेन की लिमिट भी बढ़वाई जाती थी ताकि बड़ी रकम आसानी से ट्रांसफर हो सके। गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों के लोगों से उनकी स्थानीय भाषा में बात कर विश्वास जीतते थे और फिर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम देते थे।


    डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने वाले हलवाई समेत दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इस नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपितों की भी तलाश करने के साथ ही बैंकिंग नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
    -एसएम कासिम आबिदी, डीसीपी पश्चिम

     


    ये होता है म्यूल खाता

    म्यूल खाता एक ऐसा बैंक खाता है, जिसका उपयोग जालसाज और अपराधी अवैध धन (साइबर अपराध, धोखाधड़ी या मनी लांड्रिंग) को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने या उसे सफेद करने के लिए करते हैं। इस खाते का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपने वास्तविक स्रोत को छिपाने और पुलिस की पकड़ से बचने के लिए किया जाता है।

     

    साइबर ठगी से ऐसे करें बचाव

    • सभी आनलाइन खातों के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड (अक्षर, अंक, विशेष चिह्न) का प्रयोग करें।
    • हर जगह टू-फैक्टर आथेंटिकेशन या ओटीपी वेरिफिकेशन चालू रखें।
    • अपने फोन और कंप्यूटर के एंटीवायरस और एप्स को हमेशा अपडेट रखें।
    • अज्ञात नंबरों से आए मैसेज में मौजूद लिंक एपीके फाइल पर कभी क्लिक न करें।
    • लाटरी लगने या केवाइसी जैसे प्रलोभन वाली काल से सावधान रहें।
    • बैंक कभी फोन पर आपसे पिन या ओटीपी नहीं मांगते हैं।
    • आनलाइन लेनदेन में सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करते हुए बैंक लेनदेन न करें ।
    • ओएलएक्स या अन्य वेबसाइटों पर सामान खरीदते और बेचते समय वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें।
    • पुलिस या सीबीआइ बनकर वीडियो काल पर डराने और पैसे मांगने वालों से डरे नहीं, पुलिस कभी फोन पर अरेस्ट नहीं करती।
    • साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काल कर तुरंत अपनी शिकायत दर्ज कराएं, इससे पैसा बैंक में ही फ्रीज हो सकता है।

     

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