भारतीय घरों में बिजली का उतार-चढ़ाव एक आम और बड़ी समस्या है। इसी कारण कई बार रेफ्रिजरेटर के खराब होने का खतरा भी रहता है। अगर मैं खुद की बात करूं तो मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है, लेकिन मैंने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए भारी-भरकम बाहरी स्टेबलाइजर का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि इन-बिल्ट स्टेबलाइजर वाले Fridge को चुना। आज इस विषय को खासतौर पर मैंने इसलिए चुना है ताकि मेरी तरह ही परेशान लोगों को इस तकनीक के बारे में समझा सकूं और बात सकूं कि यह फीचर ना केवल रेफ्रिजरेटर के सबसे महंगे हिस्से यानी कंप्रेसर की सुरक्षा करता है, बल्कि आपको अलग से स्टेबलाइजर खरीदने के एक्स्ट्रा खर्च से भी बचाता है।
रेफ्रिजरेटर में कैसे काम करता है इन-बिल्ट स्टेबलाइजर?
जब बिजली का वोल्टेज बहुत ज्यादा कम या बहुत ज्यादा हाई हो जाता है, तो इन-बिल्ट स्टेबलाइजर अपना काम शुरू कर देता है और यह रेफ्रिजरेटर के कंप्रेसर को मिलने वाली पावर सप्लाई को ऑटो-कट कर देता है। ऐसा करने से हाई या लो वोल्टेज का झटका कंप्रेसर तक नहीं पहुँच पाता और वह फुंकने से बच जाता है। वहीं जब बिजली वापस आती है, तो स्टेबलाइजर तुरंत कंप्रेसर चालू नहीं करता है, बल्कि 2 से 3 मिनट का समय लेकर उसे ऑन करता है। इसका फायदा यह होता है कि कंप्रेसर के अंदर गैस का दबाव नॉर्मल रहता है और लोड कम पड़ता है।
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