विचार: सबसे बड़ा और प्रभावी व्यापार समझौता, ईयू के साथ मेक इन इंडिया अभियान को मिलेगी गति
ईयू के साथ एफटीए भारत के निर्यात और निवेश के साथ विकास दर बढ़ाने में अहम होगा। देशों के साथ एफटीए के अधिकतम लाभ उठाने के लिए भारत को घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, सेवा क्षेत्र का लाभ उठाने, निर्यात में विविधता लाने, कृषि और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करने, व्यापार संतुलन को अपने पक्ष में लाने के साथ-साथ पर्यावरण और श्रम मानकों के परिपालन पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी होगा।
HighLights
भारत-ईयू ऐतिहासिक एफटीए से दो अरब का साझा बाजार।
'मेक इन इंडिया' को गति, निर्यात-निवेश में वृद्धि होगी।
यूरोपीय संघ की चीन पर निर्भरता घटेगी, नए अवसर।
डॉ. जयंतीलाल भंडारी। आखिरकार नई दिल्ली में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन की उपस्थिति में भारत-ईयू के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का एलान कर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार यह एफटीए दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का शानदार उदाहरण है।
उर्सुला ने भी इस समझौते को सभी ‘मदर आफ आल डील्स’ कहते हुए यह रेखांकित किया कि दुनिया के वर्तमान ‘ग्रोथ सेंटर’ और इस सदी के आर्थिक पावर हाउस भारत के साथ यह एफटीए यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते आर्थिक क्षेत्रों में पहली बढ़त दिलाएगा। इस एफटीए से दो अरब लोगों का एक साझा बाजार तैयार होगा और यह संयुक्त बाजार वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा। इस एफटीए ने अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बीच भारत और ईयू को नई रणनीतिक गोलबंदी के साथ व्यापारिक संबंधों को नई दिशा दी है।
भारत-ईयू एफटीए के लिए बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2013 में यह वार्ता थम गई। जून 2022 में वार्ता फिर से शुरू की गई, जो अब अंजाम तक पहुंची है। भारत और यूरोपीय संघ दोनों वैल्यू चेन के अलग-अलग स्तरों पर काम करते हैं। भारत प्रमुखतः श्रम-प्रधान और प्रसंस्करण आधारित वस्तुओं का निर्यात करता है, जबकि यूरोपीय संघ मुख्यतः पूंजीगत वस्तुओं, उन्नत प्रौद्योगिकी और औद्योगिक उत्पादों की आपूर्ति करता है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और 27 देशों के संगठन ईयू के बीच वस्तुओं और सेवाओं में कुल व्यापार 190 अरब डालर से अधिक का रहा। इसी वित्त वर्ष में दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब डालर रहा।
इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डालर और आयात 60.68 अरब डालर था। यूरोपीय संघ भारत में एक बड़ा निवेशक भी है, जिसका अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) करीब 117.4 अरब डालर रहा। इस एफटीए से भारत और यूरोपीय संघ के छात्रों, कामगारों, शोधकर्ताओं और उच्च कुशल पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाने, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक गतिशील ढांचे को आकार मिला है। यह एफटीए भारत-ईयू व्यापार के लिए महज एक व्यापार का रणनीतिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि आर्थिक पुनर्व्यवस्था के रूप में भारत और ईयू के लिए बदलते वैश्विक व्यापार वातावरण में आगे बढ़ने का अवसर देने वाला पड़ाव है।
इस एफटीए के तहत दोनों पक्ष आपसी व्यापार वाली 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क शुरुआत से ही कम या समाप्त कर देंगे, जबकि कुछ अन्य वस्तुओं पर इसे आगामी वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। यह एफटीए व्यापार, निवेश, स्वच्छ और हरित ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और रक्षा, डिजिटल पहलों, कनेक्टिविटी, अंतरिक्ष और कृषि के क्षेत्रों में आपसी प्रतिबद्धता को दिखाता है। यह वस्तुओं, सेवाओं के व्यापार और नियमों पर केंद्रित है, लेकिन निवेश संरक्षण जैसे मुद्दे अलग से सुलझाए जाएंगे।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग भारत-ईयू एफटीए का एक मुख्य स्तंभ है, जिसे संस्थागत ढांचे का समर्थन प्राप्त है और इससे अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। अंतरिक्ष सहयोग भारत-ईयू एफटीए का एक और महत्वपूर्ण आयाम है, जो दशकों के तकनीकी सहयोग पर आधारित है। जहां यह एफटीए क्लीन टेक्नोलाजी, फार्मास्यूटिकल्स और सेमीकंडक्टर जैसे खास सेक्टर में जरूरी सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, वहीं मैरीटाइम सिक्योरिटी, आतंकवाद से निपटने और साइबर-डिफेंस में सहयोग भी बढ़ाएगा।
भारत के लिए ईयू के साथ एफटीए निर्यात और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ भारत के घरेलू बाजार को बढ़ाने, मेक इन इंडिया अभियान को गति देगा। इसके जरिये भारत जहां अपने कपड़ा, चमड़ा और हथकरघा जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ा सकेगा, वहीं भारतीय पेशेवरों और आइटी सेवाओं के निर्यात के लिए यूरोपीय संघ के दरवाजे खुलेंगे और भारतीय श्रमिकों की यूरोप में सक्रियता बढ़ेगी।
यूरोपीय संघ के दृष्टिकोण से भारत के साथ एफटीए एक उभरती आर्थिकी के साथ उसका पहला समझौता है। इससे यूरोपीय संघ की निर्भरता चीन पर घटेगी। साथ ही उसे भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिकी में भी लाभ मिलेंगे। जहां शुल्क कटौती से कारों, मशीनरी, एयरक्राफ्ट और केमिकल के क्षेत्र में मौके खुलेंगे, वहीं सबसे तेजी से बढ़ते भारत के बड़े बाजार में सेवाओं, खरीद, निवेश तक ईयू देशों की पहुंच बेहतर होगी।
ईयू के साथ एफटीए भारत के निर्यात और निवेश के साथ विकास दर बढ़ाने में अहम होगा। देशों के साथ एफटीए के अधिकतम लाभ उठाने के लिए भारत को घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, सेवा क्षेत्र का लाभ उठाने, निर्यात में विविधता लाने, कृषि और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करने, व्यापार संतुलन को अपने पक्ष में लाने के साथ-साथ पर्यावरण और श्रम मानकों के परिपालन पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी होगा।
(लेखक अर्थशास्त्री हैं)







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