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जमशेदपुर DD Bar कांड: मां खाना ला ही रही थी कि दोस्त ले गया साथ...' हिमांशु की मौत पर छलका 80 वर्षीय दादा का दर्द

By Sanjeev KumarEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Tue, 30 Jun 2026 11:19 PM (IST)

जमशेदपुर के डबल डाउन बार में हिमांशु सिंह की हत्या ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनके 80 वर्षीय दादा ...और पढ़ें

हिमांशु की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

हिमांशु की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. हिमांशु सिंह की हत्या से परिवार में गहरा मातम।

  2. दोस्त प्रत्यूष की जिद पर घर से बाहर गए थे हिमांशु।

  3. प्रत्यूष का वंदे भारत से जाने का फैसला बना काल।

संजीव कुमार, जमशेदपुर। बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार में हुई खूनी वारदात ने न सिर्फ जमशेदपुर की कानून-व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है। 
 
सरायकेला करणी सेना के युवा अध्यक्ष नेता हिमांशु सिंह की असमय मौत से उनके घर में मातम छाया हुआ है। जिला प्रशासन भले ही कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन इस भयावह घटना ने स्थानीय लोगों के मन में पुलिस-प्रशासन के प्रति अविश्वास को जन्म दे दिया है।
 

मां परोसने वाली थी भोजन, तभी आ गया दोस्त 

हिमांशु के घर का माहौल इस वक्त बेहद गमगीन है। उनके 80 वर्षीय वृद्ध दादा, जो टाटा स्टील से सेवानिवृत्त हैं, इस घटना से पूरी तरह टूट चुके हैं। बाबा टीपी सिंह की आंखों से बहते आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

कांपती आवाज में उस खौफनाक रात को याद करते हुए उन्होंने कहा कि बाबू (हिमांशु) रात में घर पर ही था और खाने का इंतजार कर रहा था। उसकी मां रसोई से भोजन लेकर कमरे में आने ही वाली थी। 
 
ठीक उसी वक्त उसका दोस्त प्रत्यूष सिंह घर आया और उसे बाहर चलने के लिए जिद करने लगा। बुजुर्ग दादा ने रोते हुए बताया कि हिमांशु उस वक्त बाहर जाने के मूड में बिल्कुल नहीं था। 
 
लेकिन जब दोस्त ने बहुत ज्यादा दबाव बनाया, तो वह मना नहीं कर सका और उसके साथ चला गया। दादा कहते हैं कि देर रात किसी ने फोन पर बताया कि हिमांशु के साथ मारपीट हुई है... जो हुआ, बहुत बुरा हुआ।
 

किस्मत का वो एक फैसला, जिसने सब कुछ बदल दिया 

इस पूरी त्रासदी के पीछे नियति का एक ऐसा क्रूर मोड़ भी सामने आया है, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जा रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, हिमांशु का दोस्त प्रत्यूष सिंह भी उस रात शहर में नहीं होता, अगर उसने अपना प्लान न बदला होता।

दरअसल, प्रत्यूष को अपने परिवार के साथ बिहार स्थित पैतृक गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने जाना था। उसके माता-पिता सड़क मार्ग से गाड़ी से गांव के लिए रवाना भी हो गए थे। 
 
प्रत्यूष ने उनसे कहा था कि वह बाद में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से आ जाएगा और इसी बहाने वह शहर में ही रुक गया। किसी को क्या मालूम था कि वंदे भारत से जाने की जिद और चंद घंटों का यह ठहराव, हिमांशु के लिए काल बन जाएगा।


फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन और आरोपियों की धरपकड़ में जुटी है, लेकिन पीड़ित परिवार के आंसू प्रशासन से पूछ रहे हैं कि आखिर इस खोए हुए चिराग की भरपाई कौन करेगा?

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