जागरण संपादकीय: मेटा को चेतावनी
अभी हाल में मेटा ने प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो को हटाने को लेकर जो माफी मांगी, उसे खारिज कर सरकार ने उचित ही किया।
HighLights
भारत सरकार ने मेटा को भारतीय कानूनों के पालन की चेतावनी दी
मेटा के एल्गोरिदम और हानिकारक सामग्री पर सरकार ने जवाब मांगा
पीएम मोदी वीडियो हटाने पर माफी अस्वीकृत, सख्त कार्रवाई की मांग
यह अच्छा हुआ कि भारत सरकार ने इंस्टाग्राम, वाट्सएप और फेसबुक का संचालन करने वाली कंपनी मेटा को यह चेतावनी दी कि उसे भारतीय कानूनों का पालन करना होगा। इसके साथ ही सरकार ने मेटा से अपने एल्गोरिदम को लेकर भी जवाब तलब किया है। यह सुनिश्चित करना होगा कि इस निर्देश का वास्तव में पालन हो, क्योंकि मेटा अथवा अन्य इंटरनेट मीडिया कंपनियां एलगोरिदम का मनमाना उपयोग करती हैं।
एआइ के आगमन के बाद उनके लिए ऐसा करना और आसान हो गया है। अब यह किसी से छिपा नहीं कि इंटरनेट कंपनियां एक विशेष एजेंडे का प्रचार-प्रसार करती हैं। वे यह सुनिश्चित कर रही हैं कि लोग क्या देखें और क्या नहीं? ऐसा करके वे लोगों के चिंतन को प्रभावित कर रही हैं। चिंताजनक यह है कि यह काम प्राय: संकीर्ण उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है। यह एक तथ्य है कि इंटरनेट कंपनियां कई देशों में चुनावों को प्रभावित करने का काम कर चुकी हैं।
वे ऐसा भारत में भी कर चुकी हैं और इसका पता कैंब्रिज एनालिटिका मामले से चलता है। वैसे तो इंटरनेट मीडिया कंपनियां अपने को 'सोशल मीडिया' कहती हैं, लेकिन सच यह है कि वे असामाजिक और अराजक तत्वों को भी प्रोत्साहन प्रदान करती हैं। वे ध्रुवीकरण के साथ ही सामाजिक विभाजन की खाई भी चौड़ी कर रही हैं। वे कई बार अपने गलत इरादों की पूर्ति करती हुई पाई गई हैं। हर बार वे माफी मांगकर बच निकलती हैं।
भारत सरकार को अब केवल माफी से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। यदि कोई इंटरनेट मीडिया कंपनी अनुचित कार्य करती पाई जाए तो उसे वैसे ही कठोर दंड का भागीदार बनाया जाना चाहिए जैसे अनेक पश्चिमी देश समय-समय पर बनाते हैं और उन पर भारी जुर्माना लगाते हैं। अभी हाल में अमेरिका ने मेटा पर भारी जुर्माना लगाया। इंटरनेट मीडिया कंपनियां दुनिया भर में लोगों को लती भी बना रही हैं।
अभी हाल में मेटा ने प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो को हटाने को लेकर जो माफी मांगी, उसे खारिज कर सरकार ने उचित ही किया। समस्या केवल यह नहीं कि मेटा ने किसी खास एजेंडे के तहत शरारतपूर्ण ढंग से प्रधानमंत्री के वीडियो को हटाया, बल्कि यह भी है कि उसने यह माना कि उसके प्लेटफार्म पर बाल यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के साथ-साथ डीपफेक वीडियो को बढ़ावा दिया गया।
यह भी स्वीकारा कि उसने पैसे लेकर हानिकारक सामग्री को बढ़ावा दिया। ये सब ऐसी हरकतें हैं, जिनके लिए मेटा अथवा अन्य इंटरनेट कंपनियों को जवाबदेह बनाना अनिवार्य है। यह सही समय है कि भारत सरकार मेटा एवं अन्य इंटरनेट मीडिया कंपनियों को जवाबदेह बनाने के साथ ही इस पर भी विचार करे कि आखिर विदेशी इंटरनेट मीडिया कंपनियों पर निर्भर रहना कहां तक उचित है?









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