संपादकीय: परिसीमन बिल के आसार
शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक का समर्थन किया है, जो भाजपा के साथ उनके संबंधों में सुधार का संकेत है। यह कदम मोदी सरकार की विधेयक को शीघ्र पारित कराने की गंभीरता को दर्शाता है, जिससे महिला आरक्षण लागू होने का मार्ग प्रशस्त होगा।
HighLights
अकाली दल ने महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक का समर्थन किया।
मोदी सरकार महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने को लेकर गंभीर है।
सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50% वृद्धि का प्रस्ताव।
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करने के बाद महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक का समर्थन करने की घोषणा एक ओर जहां यह बताती है कि दोनों पुराने सहयोगी दल करीब आ रहे हैं, वहीं यह भी कि मोदी सरकार उक्त विधेयक को शीघ्र ही पारित कराने को लेकर गंभीर है।
हालांकि शिरोमणि अकाली दल का लोकसभा में एक ही सांसद है, लेकिन उसकी ओर से परिसीमन बिल का समर्थन करने की घोषणा इस संविधान संशोधन विधेयक के पक्ष में माहौल बनाने का काम करेगी। यह उल्लेखनीय है कि जब संसद के बजट सत्र में इस विधेयक को लाया गया था, तब शिरोमणि अकाली दल ने उसका विरोध किया था। जैसे इस दल ने अपना रवैया बदला, वैसे ही कुछ अन्य दल भी बदल सकते हैं।
इसके संकेत भी मिल रहे हैं। इसके अतिरिक्त तथ्य यह भी है कि बजट सत्र के मुकाबले मानसून सत्र आने तक संसद की तस्वीर बदल चुकी है। तृणमूल कांग्रेस में टूट हो चुकी है और उसके 20 लोकसभा सदस्य एक नए दल का हिस्सा बनकर भाजपा के नेतृत्व वाले राजग का हिस्सा बन चुके हैं। इसके अतिरिक्त उद्धव ठाकरे की शिवसेना के भी कई सांसद भाजपा की सहयोगी शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। आश्चर्य नहीं कि कांग्रेस से छिटक चुकी द्रमुक भी अपना रवैया बदल ले और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी। इससे सरकार का काम आसान हो सकता है।
यदि सभी राजनीतिक दल लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होते हुए सचमुच देखना चाहते हैं तो उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर परिसीमन विधेयक का समर्थन करना ही होगा। जब सरकार सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने पर सहमत हो गई है, तब फिर परिसीमन विधेयक के विरोध का कोई औचित्य नहीं रह जाता। यदि परिसीमन विधेयक पारित नहीं होता तो महिला आरक्षण को 2029 तक लागू करने का संसद का वादा पूरा नहीं होगा।
यदि ऐसा नहीं होता तो आधी आबादी के सवालों का सामना सत्तापक्ष के साथ विपक्ष को भी करना होगा। सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि के प्रस्ताव के बाद विपक्ष की यह दलील खोखली हो जाती है कि कुछ राज्यों और विशेष रूप से दक्षिण के राज्यों के साथ अन्याय होगा। विपक्ष को समझना होगा कि आबादी कम करने में सफल रहे राज्यों को राजनीतिक नुकसान तो तब होगा, जब परिसीमन नई जनगणना के बाद लागू होगा।
वर्तमान परिस्थितियों में यही उचित है कि परिसीमन विधेयक को संसद से पारित कर महिला आरक्षण को लागू करने का रास्ता साफ किया जाए। इसमें जितना अधिक विलंब होगा, महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व देने में उतनी ही देरी होगी।









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