इंडियन Protests को आसान भाषा में समझने के लिए पढ़ें ये 5 किताबें

भारतीय आंदोलनों को समझने के लिए केवल घटनाओं को जानना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके पीछे की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है। यहां दिए गए ये 5 किताबें आपको इतिहास को एक नए नजरिए से देखने और भारत में हुए जनसंघर्षों की गहराई को समझने में मदद करेंगी।
Indian Protests के बारे में जानने के लिए पढ़ें ये किताबें
Indian Protests के बारे में जानने के लिए पढ़ें ये किताबें

क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में हुए बड़े आंदोलन आखिर कैसे शुरू हुए और उन्होंने देश की राजनीति, समाज और लोकतंत्र को किस तरह प्रभावित किया? आपको बता दें, इतिहास की किताबों में हमें अक्सर सिर्फ घटनाएं पढ़ने को मिलती हैं, लेकिन उन संघर्षों के पीछे की असली कहानियां, लोगों की आवाज और बदलाव की वजहें किताबों में कहीं ज्यादा गहराई से मिलती हैं। अगर आप भारतीय आंदोलनों को सिर्फ तथ्यों के रूप में नहीं, बल्कि उनके असली मायने समझना चाहते हैं, तो ये 5 किताबें आपकी सोच को नया नजरिया देंगी और इतिहास को देखने का तरीका बदल सकती हैं। इनमें आपको अलग-अलग समय पर हुए किसान, मजदूर, सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों के बारे में समझने का मौका मिलेगा। 

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  • When People Rise in Protest. Mobilising for Equal Citizenship in India

    228 पन्नों की यह किताब प्रो. ज़ोया हसन और अविशेक झा के द्वारा लिखी गई है। इस किताब में CAA और NRC के विरोध में हुए प्रोटेस्ट के बारे में बताया गया है। अंग्रेजी भाषा की इस किताब में कहानी न केवल दिल्ली या शाहीन बाग तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के 100 से अधिक शहरों और कस्बों में हुए जन विरोधों के बारे में भी बताया गया है। इस किताब के जरिए आपको देखने को मिलेगा कि कैसे यह आंदोलन किसी एक वर्ग या धर्म का न होकर एक व्यापक राष्ट्रीय स्वरूप ले चुका था।

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  • Bhartiya Krantikari Aandolan Ka Itihas

    हिन्दी भाषा में लिखी गई यह किताब 5 साल के ऊपर के सभी लोग पढ़ सकते हैं। मन्मथनाथ गुप्त द्वारा लिखी गई 'भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन का इतिहास' भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उस पहलू को बताती है जो इतिहास के किताबों में अक्सर देखने को नहीं मिलती। इसमें 1857 से लेकर 1947 तक की क्रांतियों का विवरण आसान हिन्दी भाषा में किया गया है जिससे हर कोई इसे आराम से पढ़ सकता है। चूंकि लेखक खुद काकोरी कांड का हिस्सा थे, इसलिए उन्होंने इस घटना, क्रांतिकारियों की योजना, पुलिस की चालाकी, अदालत के मुकदमों और जेल के अंदर के कठिन जीवन का बहुत ही सटीक और वास्तविक वर्णन किया है।

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  • Broken Republic

    अरुंधति रॉय द्वारा लिखी गई किताब Broken Republic एक अंग्रेजी की किताब है जिसमें 188 पन्ने दिए गए हैं। यह किताब भारत के उस चेहरे को सामने लाती है जिसे अक्सर मुख्यधारा के मीडिया में अनदेखा कर दिया जाता है। आपको बता दें, इसमें लेखिका ने आदिवासी इलाकों विशेषकर मध्य और पूर्वी भारत के जंगलों में चल रहे संघर्ष, कॉर्पोरेट विकास की होड़ और सरकारी नीतियों के असर पर चर्चा की है। यह आदिवासियों के अधिकारों पर लिखा गया निबंधों का एक संग्रह है।

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  • Inquilab: A Decade of Protest

    2020 में प्रकाशित यह किताब पिछले एक दशक यानि 2011 से 2019 के बीच हुए प्रमुख जन-आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के बारे में बताती है। Inquilab: A Decade of Protest किताब में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, निर्भया आंदोलन, रोहित वेमुला केस, दलित और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए आंदोलन और शाहीन बाग और देश भर के विश्वविद्यालयों में हुए सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन के बारे में चर्चा की गई है। यह अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है और इसमें कुल 264 पन्ने हैं।

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  • THE DALIT MOVEMENT IN INDIA

    अगर इंडिया में हुए प्रोटेस्ट को समझना है तो किताब से बढ़िया माध्यम भला क्या हो सकता है। जी हां, 263 पन्नों की यह किताब The Dalit Movement in India दलित समाज के अधिकारों, उनके संघर्षों और सामाजिक आंदोलनों के इतिहास के बारे में समझने में आपकी मदद करेगी। इसमें सदियों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव, छुआछूत और शोषण के खिलाफ दलितों के संघर्ष को काफी विस्तार से बताया गया है और अंग्रेजी के आसान शब्दों में लिखे होने की वजह से इसे हर कोई आराम से पढ़ सकते हैं। वहीं, इस किताब के जरिए डॉ. बी.आर. आंबेडकर की लड़ाई को समझने में मदद मिलेगी।

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Faq's

  • भारतीय आंदोलनों को समझने के लिए किताबें पढ़ना क्यों जरूरी है?
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    किताबें किसी भी आंदोलन के पीछे की परिस्थितियों, कारणों और उसके समाज पर पड़े प्रभाव को विस्तार से समझाती हैं। केवल घटनाओं की जानकारी होना काफी नहीं होता, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि उन आंदोलनों ने लोगों की सोच और देश की दिशा को कैसे बदला।
  • क्या ये किताबें शुरुआती पाठकों के लिए भी उपयुक्त हैं?
    +
    देखा जाए तो, इस सूची में शामिल अधिकांश किताबें ऐसे पाठकों के लिए भी अच्छी हैं जो पहली बार भारतीय इतिहास और आंदोलनों के बारे में पढ़ना शुरू कर रहे हैं। हालांकि कुछ किताबों में विषय थोड़ा गंभीर हो सकता है, लेकिन धैर्य के साथ पढ़ने पर उन्हें आसानी से समझा जा सकता है।
  • क्या इन किताबों में केवल राजनीतिक आंदोलन ही शामिल हैं?
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    ऐसा नहीं है। इन किताबों में राजनीतिक आंदोलनों के साथ-साथ सामाजिक, जातीय, श्रमिक और लोकतांत्रिक संघर्षों का भी उल्लेख मिलता है। इससे भारतीय समाज को सही नजरिए से समझने का अवसर मिलता है।
  • क्या इन किताबों को पढ़ने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिल सकती है?
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    अगर आप UPSC, UGC NET, राज्य लोक सेवा आयोग या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो ये किताबें भारतीय इतिहास, राजनीति और समाज से जुड़े विषयों की बेहतर समझ विकसित करने में काफी मददगार साबित हो सकती हैं।